वसीम रिजवीका शीश काटनेवालेको ११ लाख रुपये पुरस्कारकी घोषणा
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्डके पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवीने उच्चतम न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट की है कि इस्लामिक ग्रन्थ कुरानसे उन २६ ‘आयतों’को निकाला जाए जो हिंसा, बलात्कार, रक्तपात और हत्याका समर्थन करती हैं । इस याचिकाके प्रविष्ट होनेके उपरान्त जिहादी, धर्मान्ध मुसलमान अत्यन्त रुष्ट हो गए हैं और उनके प्राण लेनेपर उतारू हो गए हैं । मुरादाबाद अधिवक्ता परिषदके पूर्व अध्यक्ष और अधिवक्ता अमीरुल हसन जाफरीने शनिवार, १३ मार्चको वसीम रिजवीका शीश काटनेवालेको ११ लाख रुपए पुरस्कार देनेकी घोषणा की है । उन्होंने यह घोषणा आई एम ए सभागारमें चल रहे एक सार्वजनिक कार्यक्रमके मध्य की ।
अब देखना है कि देशका हिन्दू विरोधी और मुसलमान प्रेमी समुदाय क्या प्रतिक्रिया देता है ? क्या उनके लिए वसीम रिजवी मुसलमान हैं या नहीं, यह उनकी प्रतिक्रियासे ज्ञात होगा । इस देशमें सत्य बोलनेवाले मुसलमान नगण्य हैं और वसीम रिजवी उन्हींमेंसे एक हैं । उत्तर प्रदेश शासनको उनका शीश काटने धर्मान्धको तत्काल बन्दी बनाना चाहिए और वसीम रिजवीके प्राणोंकी सुरक्षाका दायित्व लेना चाहिए ।
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