स्वयंका नाम व्याकरणदृष्टया शुद्ध लिखें !


हिन्दू व्यक्तियोंके नाम देवताओंके नामपर अथवा कोई अच्छा अर्थ व्यक्त करनेवाले होते हैं । यह नाम लिखते समय व्याकरणकी दृष्टिसे शुद्ध लिखनेसे सात्त्विकता आती है तथा ईश्वरीय तत्त्व आकृष्ट होता है; इसलिए प्रत्येकको स्वयंका नाम व्याकरणकी दृष्टिसे शुद्ध लिखना चाहिए । उदा. ‘निलेश’ न लिख ‘नीलेश’ लिखें या ‘दिपक’ न लिख दीपक’ लिखें; ‘स्वयंका नाम तो शुद्ध लिखें’, ऐसा कहना पडता है, यह हिन्दुओंकी दुर्दशा है । – (परात्पर गुरु) डॉ. जयन्त आठवले

साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात



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