क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – २१)


आज सभीको सर्वत्र वायु, ध्वनि, जल इत्यादि प्रदूषण दिखाई देता है, किन्तु ये तो मनुष्यके स्वार्थी वृत्तिके कारण होनेवाले मात्र स्थूल स्तरके प्रदूषण हैं । समाजद्वारा धर्माचरण एवं साधना न करनेके कारण सूक्ष्म स्तरका प्रदूषण इस सम्पूर्ण विश्वमें व्याप्त हो गया है ।  स्थूल स्तरके प्रदूषणको तो कुछ वर्षोंमें यदि सभी मिलकर प्रयास करें तो उसे दूर किया जा सकता है; किन्तु सूक्ष्म स्तरके प्रदूषण तो अनुवांशिक होकर अनेक पीढियोंको दूषित कर देते हैंं । पितृदोष, अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट, ऐसे ही सूक्ष्म स्तरके प्रदूषणका परिणाम है, जिसका प्रभाव अनेक पीढियोंको भोगना पडता है ।

 उसीप्रकार पूजा करते समय मनका एकाग्र न होना, पूजा करनेका मन न करना, गुरु या अपने आराध्य देवताके प्रति विकल्प आकर साधना छोड देना जैसे कष्ट आज साधकोंके मध्य सामान्यसी बात है, यह सभी भी आध्यात्मिक प्रदूषणके कारण हो रहे हैं; क्योंकि सामान्य साधकोंका आध्यात्मिक स्तर अधिक न होनेसे उनकी इच्छाशक्ति अल्प (कम) होती है; फलस्वरूप वे इस प्रदूषणके प्रवाहमें बह जाते हैं या अधिक प्रभावित होते हैं; इसलिए जो उपासना काण्डके साधक हैं, उन्होंने भावपूर्वक अधिकसे अधिक समय नामस्मरण करनेका प्रयास करना चाहिए, इससे उनका व्यष्टि कल्याण तो होता ही है साथ ही, समष्टि स्तरपर भी प्रभाव पडता है । नामजपके कारण जिस वास्तुमें उसे किया जाए वह तो शुद्ध होता ही है साथ ही, वह यदि अधिकसे अधिक साधकोंद्वारा भावपूर्वक किया जाए तो उसके स्पन्दन वातावरणमें पसरते हैं और इससे सूक्ष्म प्रदूषण अर्थात रज-तमका प्रदूषण दूर होता है, इसकी पुष्टि यह शास्त्रवचन कुछ इसप्रकार करता है –

वाग् गद् गदा द्रवते यस्य चित्तं ।
रुदत्यभीक्ष्णं  हसति क्वचिच्च ।
विलज्ज उद् गायति नृत्यते च ।
मद् भक्तियुक्तो भुवनं पुनाति ।। – श्रीमद्भागवत


    अर्थ : भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, जिसकी वाणी गदगद हो जाती है, जिसका चित्त द्रवित हो जाता है, जो बार-बार रोने लगता है, कभी हंसने लगता है, कभी लज्जा छोडकर उच्च स्वरसे गाने लगता है, कभी नाचने लगता है, ऐसा मेरा भक्त समस्त संसारको पवित्र करता है ।

  अतः सम्पूर्ण संसारमें सात्त्विकतामें वृद्धि हो, रज-तमका प्रदूषण न्यून हो इस हेतु अखण्ड नामस्मरण करें ! इस प्रकार मात्र अखण्ड व भावपूर्ण नामजप करनेसे आपकेद्वारा समष्टि साधना भी होती है । आनेवाला काल विनाशकारी है, ऐसेमें जितने अधिक लोग नामजप करेंगे, विनाशके प्रकोपकी तीव्रता उतनी ही न्यून हो जाएगी !



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