कलियुगमें नामजप सबसे सरल और सहज साधना है और यदि नामजप करते समय कुछ बातोंका ध्यान रखा जाए तो नामजपकी गुणवत्तामें निश्चित ही वृद्धि होगी । जैसे प्रतिदिन कमसे कम एक घंटे बैठकर नामजप अवश्य करें । यदि एक ही सत्रमें एक घंटे आप नहीं बैठ सकते हैं तो दो या तीन सत्रमें बैठकर नामजप करनेका प्रयास करें । ऐसा करनेसे नामजपका संस्कार मनमें अंकित होगा । यदि आपने नामजप आरम्भ किया है तो ऐसा सम्भव है कि आरम्भिक अवस्थामें आपका मन एकाग्र न हो, ऐसी स्थितिमें वैखरी वाणीमें नामजप करें यदि वह भी सम्भव न हो तो लिखकर करें; किन्तु नामजपके लिए एक घंटे प्रतिदिन अवश्य निकालें । यह सबके लिए लागू होता है, जो साधक हैं गृहस्थ हैं या जप किसी इच्छाकी पूर्तिके लिए कर रहे हों या अनिष्ट शक्तियोंके कष्टके निवारणार्थ का रहे हों ! (नामजप किसका करें ? जिन्हें गुरुमंत्र मिला हो वे मात्र गुरुमंत्रका जप करें, जिनके पास गुरुमंत्र न हो वे अपने कुलदेवता या इष्टदेवताका मंत्र जपें ।)
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