नामजपकी परिणामकारकताको कैसे बढायें ? (भाग-४)


कुछ साधक कहते हैं कि नामजप करते समय मन एकाग्र नहीं होता है | मनके न एकाग्र होनेके दो मुख्य कारण होते हैं एक तो मनमें अनेक संस्कारोंका होना और दूसरा वास्तुका अशुद्ध होना ! मनके संस्कारोंको न्यून करनेमें समय लगता है और वह साधना रुपी नित्य अभ्याससे ही साध्य हो सकता है | किन्तु वास्तुको हम अवश्य ही शुद्ध कर सकते हैं | इस विषयमें हमने आपको धर्मधाराके सत्संग तथा अपने लेखोंके माध्यमसे अनके तथ्य बता ही चुके हैं; अतः नामजप करनेसे पूर्व जिस कक्षमें आप नामजप करने जा रहे हैं वहां स्वच्छता कर, उसकी वास्तु-शुद्धि करेंगे तो आपको नामजपमें अवश्य ही कुछ सुधार अनुभव होगा | साथ ही नामजप अपने घरके मंदिरमें या प्रातः खुले आकाश व उगते सूर्यके संरक्षणमें नामजप करनेसे भी एकाग्रता वृद्धिमें लाभ मिलती है | साथ यदि आपके पास समय तो आपके अपने निकटके कोई सिद्ध देवस्थानमें या अपने गुरुके आश्रममें भी जाकर भी जप कर सकते हैं, इससे भी आपके ऊपर आध्यात्मिक उपचार होगा और आपका मन एकाग्र होगा !



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