नामजपकी परिणामकारकताको कैसे बढायें ? (भाग -२)


प्रारम्भिक अवस्थाके साधक यदि नामजप ब्राह्म मुहूर्तके कालमें (सूर्योदयसे ७२ मिनिट पूर्व) करें तो उसे नामजपका अधिक लाभ मिलता है; क्योंकि इस कालमें वातावरणमें अधिक चैतन्य होनेसे मन नामजप करते समय शीघ्र एकाग्र हो जाता है और साथ ही कोई अनावश्यक विघ्न जैसे दूरभाष, कोलाहल(शोर), अतिथि इत्यादिके माध्यमसे भी नामजपके खण्डित होनेकी सम्भावना नहीं होती है |    नामजप करनेसे पूर्व स्नान, योगासन एवं प्राणायाम, यदि कर लिया जाए तो मन शीघ्र एकाग्र हो जाता है | मात्र ध्यान रहे कि योगासन इतना न किया जाए कि शरीर थक जाए और नामजप करते समय नींद आने लगे !    यदि आपके लिए प्रातः सूर्योदय पूर्व उठना सम्भव न हो तो जब आपकी सुविधा हो तब नामजप करें | नामजप करते समय यदि नींद आए तो नामजपकी परिणामकारकता घट जाती है ! रात्रि ग्यारहके पश्चात जागकर नामजप बैठकर करना टालें; क्योंकि तमोगुणका प्राबल्य होनेसे नामजपके द्वारा जो सात्त्विकता मिलती है वह थोडे प्रमाणमें तमके वातवरणसे युद्ध करनेसे नष्ट हो जाती है !   नामजप करते समय अपना एक पृथक (अलग) आसन रखें एवं नामजप हेतु यदि आप मालाका उपयोग करते हैं तो उसे भी एक गोमुखीमें रखें ! नामजप हेतु आपकी पृथक माला होनी चाहिए उसे और किसीको अन्य व्यक्ति या घरके सदस्यको जपने हेतु न दें |(नामजप किसका करें ? जिन्हें गुरुमंत्र मिला हो वे मात्र गुरुमंत्रका जप करें, जिनके पास गुरुमंत्र न हो वे अपने कुलदेवता या इष्टदेवताका मंत्र जपें ।) 



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