क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – १)


ईश्वरका नाम एक कामधेनु गाय एवं कल्पतरु वृक्ष समान है । यह नाम सकाम और निष्काम दोनों ही भक्तोंके मनोरथोंको पूर्ण करनेका सामर्थ्य रखता है । भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों ही अखण्ड नामस्मरण कर हमें यह सीख देते हैं कि नामजप सभीके लिए कल्याणकारी है । इसकी महिमाको शब्दोंमें व्यक्त करना असम्भव है, जो इसका नियमित या अखण्ड स्मरण करता है वही इसके महत्त्वको समझ सकता है, अन्यथा इसके सामर्थ्यको समझना या समझाना दोनों ही कठिन है । सृष्टिके इतिहासमें ऐसे अनेक साक्ष्य हैं, जिससे यह सिद्ध हो चूका है कि नामसंकीर्तनयोगसे सभी प्रकारके जीवोंका उद्धार सम्भव है, जैसे अग्नि सभीको पवित्र करती है वैसे ही यह भी सभी पापोंका नाश कर जीवको पाप-पुण्यके बंधनसे परे ले जाता है । इसकी पुष्टि यह शास्त्रवचन इसप्रकार करती है –
सत्वशुद्धिकरं नाम नाम ज्ञानप्रदं स्मृतम् ।
मुमुक्षाणां मुक्तिप्रदं कामिनां सर्वकामदम् ।।
अर्थ :
सत्य है कि हरिका नाम मनुष्योंकी शुद्धि करनेवाला, ज्ञान प्रदान करनेवाला, मुमुक्षुओंको मुक्ति देने वाला और इच्छुकोंकी सर्व मनोकामनाओंको पूर्ण करनेवाला है । – तनुजा ठाकुर



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