मई २, २०१९
इस्लामिक स्टेटसे (आइएससे) सम्बन्धित संगठन ‘अल-मुरसलत’ नामक अनजानसे आतंकी संगठनने श्रीलंकाकी भांति भारत और बांग्लादेशमें आक्रमणकी चेतावनी दी है । समूहने चेतावनी भरा फलक (पोस्टर) जारी कर कहा है, “बंगाल और हिन्दमें खलीफाके योद्धाओंकी आवाज कभी बन्द नहीं हो सकती । हमारी बदलेकी प्यास कभी शान्त नहीं होगी ।” ईस्टरके दिवस श्रीलंकामें तीन गिरिजाघरों और तीन विश्रामालयोंमें हुए आत्मघाती आक्रमणमें २५३ लोग मारे गए थे ।
गुप्तचर विभागके एक अधिकारीने बताया कि इस संगठनने अबु मुहम्मद अल-बंगालीको बांग्लादेशमें अपना मुखिया नियुक्त किया है । बंगालीको आतंकी आक्रमणकी योजना बनाने और नूतन आतंकियोंको प्रविष्ट (भर्ती) करनेका उत्तरदायित्व दिया गया है ।
इस फलक (पोस्टर) जारी करनेसे पूर्व इस आतंकी संगठनने बांग्लादेशकी राजधानी ढाकामें गुलिस्तां नाटकशालाके (सिनेमाके) पास छोटा विस्फोट कराया था, इसमें किसीके प्राण तो नहीं गए; परन्तु कुछ पुलसिकर्मी चोटिल हुए हैं ।
यह चेतावनी ऐसे समयमें भी आई है, जबकि पांच वर्ष पश्चात आइएस मुखिया अबु बक्र अल-बगदादीका एक वीडियो सन्देश भी सामने आया है, जिसमें उसने सीरियामें अपने संगठनकी पराजयकी बात मानी है और मुस्लिमोंको ईसाईयोंके प्रति भडकाया है ।
भारतीय गुप्तचर विभागको शंका है कि आइएस अपने छोटे गुटोंकेद्वारा भारतके साथ ही बांग्लादेशमें आतंकी आक्रमण कर सकता है; इसलिए गुप्तचर विभागोंकी दृष्टि बांग्लादेशमें होनेवाली प्रत्येक छोटी-बडी गतिविधियोंपर बनी हुई है ।
गुप्तचर विभागका यह भी कहना है कि अल मुरसलतने पश्चिम बंगाल और बांग्लादेशके कुछ क्षेत्रोंमें पोस्ट भी वितरण किए हैं और अपने समर्थकोंको एकत्र करनेका प्रयास किया है । पोस्टरपर लिखा है, “शीघ्र आ रहे हैं, इंशाअल्लाह ।”
अनजानसे आतंकी संगठन अल-मुरसलतकी ओरसे संकटकी अनदेखी इसलिए भी नहीं की जा सकती; क्योंकि इसीप्रकारके अनजान संगठन और आइएससे सम्बन्धित नेशनल तौहीद जमातने (एनटीजे) श्रीलंकामें आतंकी आक्रमण किया था ।
“भारत शासनको इसीलिए अब और तीव्रतासे देशमें बैठे आतंकियों और उनके आश्रय स्थलोंपर कार्यवाहीकी आवश्यता है; क्योंकि इन्हीं सबका आश्रय लेकर ये आतंकी भारतमें आनेकी चेतावनी देते हैं । यह हमारा दुर्भाग्य है कि आजतकके जितने भी शासन आए, उन्होंने आतंकी संस्थाओंको पोषित ही किया, जिसका परिणाम यह हुआ कि ये देशके कोने-२ में फैल गए; परन्तु भाजपाके मोदी शासन अन्तर्गत आतंकी संस्थाओंपर जो कार्यवाही हुई हैं, उससे वे सन्तुलन खोए बैठे हैं और ऐसी गीदड भभकी दे रहे हैं; परन्तु हमें इन्हें भी हल्केमें नहीं लेना चाहिए और आतंकियोंको नष्ट करने हेतु सभी प्रकारसे सज्ज रहना चाहिए ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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