नवरात्रके समय होनेवाली चूकोंको टालकर भावपूर्वक करें साधना (भाग-१)


हिन्दुओंको धर्मशिक्षण न मिलनेके कारण व्रत-त्योहारके समय उनसे अनेक चूकें होती हैं । इसलिए नवरात्रके समय कौनसी चूकोंसे बचना चाहिए ?, इस हेतु यह शृंखला आरम्भ कर रही हूं, कृपया साधक इन बातोंका अवश्य ध्यान रखें !
१. यदि नवरात्रमें देवीकी प्रतिमा मिट्टी की हो तो उसकी नौ दिनकी पूजाके पश्चात विजयादशमीको अवश्य ही विसर्जन करें; क्योंकि मिट्टी के विग्रहकी यदि विधिवत पूजा न की जाए तो उनमें देवत्व नहीं रहता है एवं पूजा किए बिना या प्राण प्रतिष्ठित प्रतिमाकी यदि विधिवत पूजा न की जाए तो देवताके गण अपने आराध्यकी अवहेलना देखकर कुपित होते हैं एवं पूजकको कभी-कभी शापित भी कर देते हैं ।
 यदि विग्रह या प्रतिमा धातुकी हो तो उसका विसर्जन न करें ! उसे नवमी तिथिके पश्चात पुनः यथावत पूजाघरमें रख दें ! यदि देवीके चित्रकी पूजा करते हैं और उसे आपको विसर्जित करना हो तो उसे काच व लकडीके ‘फ्रेम’में मढवाया हो तो चित्र उससे निकालकर जलमें प्रवाहित करें ! जलमें प्रवाहित करते समय उसे फेंके नहीं, आदरके साथ बहते जलमें विदाई दें ! पूजित विग्रहको वृक्ष इत्यादिके नीचे न छोडकर जाएं, इससे उनकी सेवा करनेवाले गण कुपित होते हैं । वैसे ऐसे चित्रोंको भी आप नवमीके दिवस हवन इत्यादि हो जानेपर पुनः पूजाघरमें रख सकते हैं ।
विग्रह अथवा प्रतिमापर पञ्चोपचार करते समय यह भाव रखना चाहिए कि यह साक्षात देवी दुर्गा हैं, चाहे उसका आकार कितना भी छोटा हो ।


Leave a Reply

Your email address will not be published.

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution