नवरात्रमें हिन्दू राष्ट्रके स्थापना निमित्त किए अनुष्ठान की अनुभूति !


जब भी कोई अनुष्ठान होता है तो ईश्वर मुझे निश्चित ही कोई विशिष्ट अनुभूति देते हैं, जो मैं समाजके साथ भी साझा कर सकती हूं ।
इस बार वैदिक उपासना पीठके देश-विदेशके साधकोंने व्यष्टि एवं ‘ऑनलाइन’ सामूहिक स्तरपर नवरात्रमें हिन्दू राष्ट्रके स्थापनाके निमित्त दस लाख ‘श्री राम जय राम जय जय राम’का जप किया और आश्रममें उस जपके दशांशके दशांशका हवन, तर्पण एवं मार्जन पञ्चमी तिथिसे विजयादशमीतक सन्ध्या समयमें किया गया ।
इस अनुष्ठानमें इंदौरके कुछ स्थानीय साधक, भक्तवात्सल्य आश्रमके कुछ प्रमुख सेवक एवं ‘ट्रस्टी’ तथा ‘जानापाव’के हीरा बाबा एवं कुछ अन्य भक्त भिन्न दिवसोंमें सम्मिलित हुए थे । इस कार्यक्रमका पौरोहित्य आश्रमके समीपके गांवके पुरोहित श्री. ओमप्रकाश व्यासने बहुत प्रेम, निष्ठा एवं भावसे किया, जबकि हम उनसे पहली बार ही मिले थे ।
हमारी एक गोमाताके एक थनसे पितृपक्षसे रक्त (खून) आ रहा था अर्थात दूधका रंग रक्त आनेके कारण रक्तिम (गुलाबी) होता था । हमने यथासम्भव सर्व उपाय कराए; किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ; किन्तु नवमी तिथिको स्वतः ही अकस्मात उसका यह कष्ट दूर हो गया । जबकि यज्ञस्थल और गोशालामें तीन सौ फुटकी दूरी है, तब भी उसका प्रभाव गोमातापर हो गया । यह यज्ञका महत्त्व है ।

– (पू.) तनुजा ठाकुर, संस्थापिका (वैदिक उपासना पीठ)



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