१६ मई, २०२१
बंगाल शासनपर अनुसूचित जाति आयोगने हिंसाके गम्भीर आरोप लगाए हैं । आयोगके अध्यक्ष विजय सांपलाने पत्रकारवार्तामें उजागर किया कि दो मईके चुनावोंके पश्चात, बंगालमें हिंसाके १६२७ प्रकरण सामने आए हैं, जिनमें दुष्कर्मके १२ प्रकरण और २० लोगोंकी हत्याके प्रकरण हैं । दो मईके पश्चात, विशेषकर अनुसूचित जातिपर बहुत बुरा प्रभाव पडा है । इसके एक सप्ताहके पश्चात ६७२ नए प्रकरण सामने आए, जिसके लिए ‘एसएचओ’के विरुद्ध जांच करनेकी मांग की गई । जिन परिवारोंको हानि हुई है, उनकी सहायताके लिए शासनको आगे आना चाहिए । विश्व हिन्दू परिषदने भी पत्र लिखकर राष्ट्रपतिसे जांचकी मांग की है । भयके कारण कई हिन्दू परिवार पलायन करके दूसरे राज्योंमें जा चुके हैं; जबकि कई कार्यकर्ताओंकी हत्या की जा चुकी है । थानेमें परिवाद करनेवालोंपर पुलिसद्वारा ही प्रताडित किया जाता रहा है । हिन्दुओंके घरोंको लूटा गया, घरोंको जलाया गया और महिलाओंके साथ दुष्कर्म किया गया । इन घटनाओंको १९४७ में देशके विभाजनके पश्चात, ऐसी प्रथम घटना माना गया है ।
ममताके शासनके प्रारम्भमें, वहांके निवासियोंको जिस प्रकार त्रस्त किया गया है, उससे यह सुनिश्चित है कि यदि बंगालके शासनको शीघ्रतासे नियन्त्रित नहीं किया गया तो देशकी स्थिति सङ्कटमें पड जाएगी । भारत शासन तत्काल बंगालमें राष्ट्रपति शासन लगाकर राज्यमें सुरक्षाका वातावरण उत्पन्न करे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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