फरवरी १५, २०१९
पुलवामामें हुए आतंकी आक्रमणको लेकर आपत्तिजनक पोस्ट करनेपर देहलीमें ‘एनडीटीवी’ समाचार वाहिनीके लिए कार्य करनेवाली एक पत्रकारको निलम्बित कर दिया गया है ।
‘एनडीटीवी’में सहायक समाचार सम्पादक कार्यरत निधि सेठीने पुलवामा आक्रमणको लेकर ‘फेसबुक’पर टिप्पणी की थी । इसमें वह स्पष्ट रूपसे प्रतिबन्धित आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’के कृत्यका एकप्रकारसे समर्थन करती दिख रही थीं । उन्होंने अपना लेख ‘#HowstheJaish (हाउ इज द जैश)’के ‘हैशटैग’के साथ किया था !
इसके पश्चात वह उपभोक्ताओंके लक्ष्यपर आ गई थीं । उपभोक्ताओंने ‘जैश-ए-मोहम्मद’के आक्रमणकी कथित प्रशंसा करनेके लिए निधि सेठीकी आलोचना की ।
निधिने पुलवामा आक्रमणके पश्चात लिखा, ‘’मिथकीय ५६ की तुलनामें भयानक ४४ बडी संख्या सिद्ध हुई है ।” इसके साथ निधिने ‘#HowstheJaish (हाउ इज द जैश)’का हैशटैग प्रयोग किया । यह वही उपवाक्य है, जिसका प्रयोग आतंकी संगठनसे सहानुभूति रखनेवाले करते हैं । इसीका प्रयोग करनेवाले अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटीके एक छात्रके विरुद्घ प्राथमिकी प्रविष्ट हुई है ।
उधर, इसके पश्चात ‘एनडीटीवी’ने अपने आधिकारिक ‘ट्विटर’से एक वक्तव्य जारीकर कहा कि वे अपने सम्पादकद्वारा की गई इसप्रकारकी टिप्पणीकी निंदा करते हैं । उन्हें दो सप्ताहके लिए निलम्बित कर दिया गया है ।
इस टिप्पणीके पश्चात कई उपभोक्ताओंने समाचार वाहिनीके विरुद्घ कार्यवाही किए जानेकी मांग की है ।
“अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताके नामपर एक बडे समाचार माध्यमकी उपसम्पादक इसप्रकारका घृणित कृत्य कर सकती हैं तो आतंकी समर्थकोंको क्या कहें ? जब एक उपसम्पादकके मनमें प्रधानमन्त्रीके प्रति इतना विष है कि उन्हें इसका ज्ञान नहीं कि क्या बोलना है और क्या नहीं ? किसका कब प्रयोग करना है ? तो सम्पादक कैसा और वह देशको क्या सत्यसे अवगत कराएगा ?, यह संदेहास्पद ही है ! एक ऐसी घटना जब समूचे राष्ट्रको एक खडा होना चाहिए तब ये घृणित ‘हाउज द जैश’का प्रयोग करते हुए इन्हें लज्जा नहीं आती है ! समाचार माध्यमोंको उच्चतम न्यायालयने इतनी भी स्वतन्त्रता नहीं दी है कि अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताके नामपर उहें कुछ भी लिखनेकी आज्ञा दी जा सके ! गत कुछ समयमें समाचार माध्यमोंमें भी राष्ट्रद्रोहियोंकी संख्या बढी है । ऐसा घृणित कृत्य पुनः न हो, इस हेतु शासनको इन्हें पूर्णतया प्रतिबन्धित करना चाहिए और यदि समाचार माध्यम यदि पत्रकारपर पूर्णप्रतिबन्धकी कार्यवाही न करें तो उसे भी बन्द करना चाहिए !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : माय नेशन
Leave a Reply