बिहारमें ‘दलित’के साथ ‘सवर्ण’का अत्याचार, ‘एनडीटीवी’ पत्रकार और साक्षी जोशीने प्रसारित किया झूठा समाचार


१५ अप्रैल, २०२१
         बिहारका एक दृश्यपट (वीडियो) प्रसारित हो रहा है, जिसके आधारपर प्रमाण दिया जा रहा है कि एक ‘दलित’ व्यक्तिको थूक चाटनेके लिए सामन्ती विचारधाराके लोगोंने बाध्य किया । अन्तर्जालपर इसके विषयमें कहा जा रहा है कि बिहारमें नीतीश कुमारके राजमें एक ‘दलित’के साथ ‘सवर्ण’ अत्याचार कर रहे हैं । इस ‘वीडियो’में पीडितको उठक-बैठक करनेके लिए कहा जाता है और कहवाया जाता है कि चूक नहीं करेगा ।
     ‘एनडीटीवी’के पत्रकार मनीषने लिखा, “देखिए, बिहारके गया जनपदमें पंचायत चुनावमें सर उठानेके लिए सामन्ती लोग एक दलितको थूक चाटनेका कैसा दण्ड दे रहे हैं !” नीतीश कुमारके शासनमें सब कुछ ठीक नहीं ।⁦ दुष्प्रचार किया जा रहा है कि एक ‘दलित’को सामान्य वर्गके व्यक्तिने थूक चटवाया ।⁦
      बिहार पुलिसने इस घटनामें संज्ञान लिया है ।⁦ इसके लिए आरोपी लोगोंको बन्दी बना लिया गया है ।⁦
     पुलिसने बताया कि यह प्रकरण गयाके एक गांवका है, ‘एसएसपी’ आदित्य कुमारने बताया कि वो व्यक्ति अपने ही समुदायकी एक महिलाके साथ भाग गया था ।⁦ जब वह लौटा तो उसे पंचायतमें ले जाया गया ।⁦ उसी गांवमें जहांसे वह भागा था ।⁦ इस घटनामें ६ व्यक्तियोंको बन्दी बनाया गया है ।⁦ आरोपियोंमें महिलाका पिता और भाई सम्मिलित हैं ।
     इस प्रकरणमें ‘एससी/एसटी’ विधानके अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया है ।⁦ अन्य आरोपियोंकी जांच की जा रही है, जबकि ‘एनडीटीवी’का पत्रकार मनीष पीडितका एक चलचित्र प्रसारितकर झूठा सन्देश फैला रहा था कि मुखियाके पक्षमें प्रचार न करनेके कारण उसके साथ ऐसा किया गया ।⁦ साक्षी जोशी जैसे पत्रकारोंने भी इस षड्यन्त्रको आगे बढाया ।
      भारतीय विधानमें समाचार वाहिनीयोंको निष्पक्षतासे समाचार प्रसारित करनेका अधिकार है; परन्तु आज प्रसारवाहिनियां अपनी दर्शक सङ्ख्या बढानेके लिए अनेक झूठे समाचार प्रकाशित और साझा करती हैं । ऐसे झूठे छद्म समाचार प्रसारकोंको शासनद्वारा दण्ड देना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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