इरफान, महबूब, अहमदने कर लिया था राजभवनके स्थानपर अतिक्रमण नीलकण्ठेश्वर मन्दिरका मार्ग हुआ स्वतन्त्र, 


१८ फरवरी, २०२१
     मध्य प्रदेशके विदिशा जिलेमें उदयपुरका एक सहस्र वर्ष प्राचीन नीलकण्ठेश्वर महादेव मन्दिर है, जो अब दूरसे दिखने लगा है ।
        ज्ञातव्य है कि पुरातात्विक महत्त्वके इस भवनकी एक भीतको नष्टकर सीमेंट और लोहेका द्वार लगा दिया गया था और पुरानी भीतपरनिजी सम्पत्तिका एक फलक लगा दिया गया था और इसपर काजी सैयद इरफान अली, महबूब अली और अहमद अलीका नाम लिखा था । जो अब मुक्त हो चुका है और नीलकण्ठेश्वर मन्दिरतक पहुंचनेका मार्ग अब सुगम होता जा रहा है, क्योंकि निर्माण कार्यने गति पकड ली है । जो मार्ग पहले तक मात्र १० फुटका था, वह अब ३० फुटका हो गया है । मार्गको सुगम बनानेमें न केवल प्रशासन; अपितु स्थानीय लोगोंने भी रुचि दिखाई और योगदान दिया ।
         यह इसलिए हो पाया है; क्योंकि मध्यप्रदेशमें अब हिन्दुओंके प्रतिकूल शासन नहीं है, अन्यथा श्रीरामजन्मभूमि और भोजशालाकी भांति संघर्ष ही करना पडता । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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