नेपाल सीमासे लगे उत्तर प्रदेशके ७ जनपदोंमें ३ वर्षोंमें २६ प्रतिशत ‘मस्जिद-मदरसों’की हुई वृद्धि


१२ जनवरी, २०२२
      नेपालकी सीमासे लगे उत्तरप्रदेशके सात जनपदोंमें ‘मस्जिदों’ और ‘मदरसों’की आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है । सशस्त्र बलोंके अधिकारियोंके अनुसार, १५ किलोमीटरकी सीमामें विगत ३ वर्षों में ७३८ ‘मस्जिदों’से बढकर यह संख्या १००० हो गई है और ‘मदरसे’ ५०० से बढकर ६४५ हो गए हैं । नेपालके साथ भारतकी सीमा १७५१ किलोमीटर लम्बी है, जो उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल और सिक्किमके क्षेत्रोंसे मिलती है । इसमेंसे नेपालकी ५७० किलोमीटर सीमा केवल उत्तर प्रदेशसे लगती है । इस क्षेत्रमें ३० ‘बॉर्डर पुलिस स्टेशन’ भी हैं, जिनमें महारजगंज, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, पीलीभीत और खीरीके जनपद सम्मिलित हैं । उत्तरप्रदेश-नेपाल सीमापर कूट (जाली) भारतीय मुद्रा और मादक पदार्थोंकी चोरीसे आयात भी बढा है । गत कुछ समयसे पाकिस्तानने नेपालमें सुरक्षित आतङ्की ठिकाने बनाने आरम्भ कर दिए हैं और चीन भी अब इसमें अत्यधिक रुचि ले रहा है ।
   अधिकतर ‘मदरसे’ भारत-नेपालके सीमावर्ती क्षेत्रोंमें खुले हैं । वर्ष १९९० तक सिद्धार्थ नगर जनपदमें कुल १६ मान्यता प्राप्त ‘मदरसे’ थे । वर्ष २००० में इन ‘मदरसों’की संख्या बढकर १४७ हो गई, अब यह ६४५ बताई जा रही है । उत्तर भारतमें एक मुस्लिम पट्टी बनानेका षड्यन्त्र चल रहा है । इस पट्टीमें बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्योंके क्षेत्र, पाकिस्तान और बांग्लादेशसे जोड दिए जाएंगे । ‘दैनिक जागरणमें प्रकाशित एक लेखमें, इस ‘गलियारे’में मुसलमानोंको बडी संख्यामें बसानेका कार्य आरम्भ किया जा रहा है ।
       जिहादी किसी प्रकार अपनी बस्तियां बसकर भारतकी भूमिको अतिक्रमित करनेका प्रयास कर रहे हैं और इस षड्यन्त्रमें देश-विदेशकी देशद्रोही शक्तियां उनको अप्रत्यक्ष रूपसे सहयोग दे रही हैं । केन्द्र शासनको इस षड्यन्त्रका भी सजगतासे समूल नाश करना होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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