नोटबन्दीके समय नेताओंकी अध्‍यक्षता वाले सहकारी बैंकोंमें बडी मात्रामें धन जमा हुआ, आरटीआईसे उजागर हुआ


सितम्बर १८, २०१८

प्रधानमन्त्रीद्वारा नोटबन्दीका निर्णय लिया गया था । अपने ही पैसोंको पुनः बैंकमें जमा करने और उन्हें निकालनेके क्रममें लोगोंको काफी परेशानी हुई । लोग कई दिनोंतक बैंककी पंक्तिमें खडे रहे; लेकिन इस मध्य भारतके राजनीतिक दलके नेताओंद्वारा चलाए जा रहे सहकारी बैंकोंमें बहुत धन जमा हुआ । इनमें भाजपा, शिवसेना, कांग्रेस से लेकर राकंपाके नेता तक सम्मिलित हैं । यह जानकारी ‘आरटीआई’के माध्यम से मिली है ! ‘नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एण्ड रूरल डेवलपमेण्ट’के (नाबार्ड) आरटीआई ब्यौरेके अनुसार, देशमें ३७० प्रान्तीय केन्द्रीय सहकारी बैंकने (डीसीसीबी) १० नवम्बर से ३१ दिसम्बर, २०१६ तक ५०० रुपये और १००० रुपयेके २२२७० कोट्यावधि रुपयेके पुराने नोट परिवर्तितक्षकिए ! इनमें १८.८२ प्रतिशत शीर्ष दस जिला सहकारी बैंकोंद्वारा किया गया ! इनमें से चार गुजरात गुजरातमें हैं, चार महाराष्ट्रमें, एक हिमाचल प्रदेशमें और एक कर्नाटकमें है ।

७४५.५९ कोटि रुपयेके पुराने नोट बदलनेके साथ गुजरातके अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक सबसे ऊपर पर है । यहांके निदेशक भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और अध्यक्ष बीजेपी नेता अजयभाई एच पटेल हैं ! दूसरा ६९३.१९ कोटि रुपयेके साथ, राजकोट जिला सहकारी बैंक है । इसके अध्यक्ष जयेशभाई राडियाडिया हैं । तीसरे स्थानपर पुणे जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक है, जिसके अध्यक्ष पूर्व एनसीपी विधायक रमेश थोरात हैं । इस बैंककी उपाध्यक्ष कांग्रेस नेता अर्चना गारे हैं ! वहीं, एनसीपी प्रमुख शरद पवारके भतीजे इसके निदेशकोंमें सम्मिलित हैं । चाैथे स्थानपर कांगरा जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक है, जहां ५४३.११ कोटि रुपये बदले गए ! इस बैंकके अध्यक्ष कांग्रेस नेता जगदीश सपेहिया थे, जिन्हें ९ माह पूर्व निलम्बित कर दिया गया । पांचवे स्थानपर सूरत जिला सहकारी बैंक है, जहां ३६९.८५ कोटि रुपये बदले गए,  इसके अध्यक्ष भाजपा नेता नरेशभाई भिखाभाई पटेल हैं ।

छठे स्थानपर सबरकण्ठा जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक है, जहां ३२८.५ कोटि रुपये बदले गए, इसके अध्यक्ष भाजपा नेता महेशभाई अमिचन्दभाई पटेल हैं । सातवें स्थानपर साउठ केनरा सहकारी बैक है, जहां ३२७.८१ कोटि रुपये बदले गए, इसके अध्यक्ष कांग्रेस नेता एमएन राजेन्द्र कुमार है ।

 

“इससे स्पष्ट है कि देशवासी जिन नेताओंसे आशाएं लगाए बैठे है, वह पूर्णतया व्यर्थ है ! हिन्दू राष्ट्र ही एकमात्र पर्याय है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जनसत्ता



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