‘न्यूयॉर्क टाइम्स’को संवाददाता नहीं; अपितु चाहिए हिन्दुओंके प्रति घृणा फैलानेवाला
२ जुलाई, २०२१
प्रायः ‘हिन्दूफोबिक’ प्रकरण देकर विवादोंमें आनेवाला ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ अब ‘जॉब रिक्रूटमेंट’के मध्य भी स्पष्टतः हिन्दू घृणासे नहीं हट रहा । इस समाचारपत्रने १ जुलाईको ‘लिंक्डइन’पर ‘जॉब रिक्रूटमेंट’ साझा किया । यह व्यवसाय देहलीमें ‘साउथ एशिया’ व्यापारी संवाददाताके लिए है । इसमें ‘हायरिंग’के प्रतिबन्ध देखकर ऐसा लगता है, जैसे बिना हिन्दू विरोधी अथवा मोदी विरोधी हुए वहां व्यवसाय मिलना अत्यन्त कठिन है ।
अपने विज्ञापनके माध्यमसे इन्होंने स्पष्ट बताया है कि अभ्यार्थी ऐसा हो, जो भारत शासनके विरुद्ध लिख सके और सत्ता परिवर्तनके उनके प्रयासोंमें अपना योगदान दे सके । इस व्यवसाय ‘पोस्टिंग’में समाचारपत्रने यहांतक लिख दिया है कि वैसे तो भारत जनसङ्ख्याके सन्दर्भमें चीनको टक्कर दे रहा है; परन्तु तो भी विश्व ‘मंच’पर बडी ‘आवाज’ बननेकी महत्त्वाकांक्षा रखे हुए है ।
यह तो स्पष्ट है कि इन सबमें हानि भारतकी नहीं; अपितु चीनकी हुई और यह भी स्पष्ट है कि ‘एनवाईटी’ इससे अप्रसन्न है । विदेशी समाचारपत्रके ऐसे कार्योंसे उसकी अपनी स्थितिका अवश्य ज्ञात होता है, जो ‘सीसीपी’से रुपए लेनेको विवश हैं । ‘एनवाईटी’ कहता है कि प्रधानमन्त्री मोदी देशके हिन्दुओंको सशक्त बना रहे हैं, जो कि यहांके बहुसंस्कृतिवादके सिद्धान्तोंके विरुद्ध हैं । विदेशी समाचारपत्रका यह भी कहना है कि ‘एनवाईटी’ भारत, अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताका दमन करनेमें लगा हुआ है; यद्यपि इस बातके प्रमाण क्या हैं ? वह इसे नहीं बताता । अपनी ‘जॉब पोस्ट’के विवरणमें ऐसी बातोंको सम्मिलित करना स्पष्ट रूपसे इंगित करता है कि ‘एनवाईटी’ एक स्पष्ट वैचारिक झुकाववाले पत्रकारोंका शोध कर रहा है और जो हिन्दू विरोध दिखानेके लिए स्वतन्त्र होंगे ।
पत्रकारका कार्य निष्पक्ष होकर लोगोंको उचित जानकारी प्रदान करना है; किन्तु लोग इस पदका दुरुपयोगकर पक्षपात कर रहे हैं । ऐसा तो अब सभी स्थानोंपर आरम्भ हो गया है, विशेषकर हिन्दुओंके विरोधमें कार्य करना । सभी हिन्दुओंको ऐसे लोगोंके विरुद्ध मुखर होकर विरोध करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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