निधर्मी लोकतंत्रमें देशके राजनेता एक राष्ट्र भाषा तक नहीं दे पाए !


इस निधर्मी लोकतंत्रके विषयमें और क्या कहा जाए कि सात दशक पश्चात इस देशके राजनेता इस देशको एकसूत्रमें पिरोने हेतु एक राष्ट्र भाषा तक नहीं दे पाए ! आज भी अधिकांश दक्षिण भारतीय राज्योंमें हिंदी भाषाको हेय दृष्टिसे देखा जाता है !



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