‘रोड नहीं, वोट नहीं’: ग्रामीणोंने की चुनाव बहिष्कारकी घोषणा !


अप्रैल ०७, २०१९

हिमाचल प्रदेशके एक गांवकी निवासी ८३ वर्षीय कौशल्या देवीके पांवकी शल्यचिकित्साका अवसर आया तब उन्हें खाटपर गांवके बाहर सडक मार्गपर ले जाया गया और इसके पश्चात रोगी वाहनसे (ऐम्बुलेंससे) चिकित्सालय ले जाया गया । हिमाचल प्रदेशके कांगडा जनपदमें लाहरू टिका गांवके निवासी लगभग दो सौ मीटर लम्बी एक संकरी कच्ची पगडंडीका प्रयोग करके गांवके साथ लगे सडक मार्गतक पहुंचनेके लिए गत कई दशकोंसे कर हैं । यह पगडंडी केवल तीन फुट चौडी है ।


कौशल्या देवीके सम्बन्धी विपिन कुमारने दावा किया कि लाहरू टीकाके ३०० निवासी दो दशकोंसे अधिक समयसे उचित सडक बनानेकी अपनी मांग उठा रहे है; परन्तु उसे दबा दिया जाता है । अधिकारियोंकी उपेक्षा और उदासीनतासे उद्विग्न हो चुके ग्रामीणोंने अब इसे चुनावी मुद्दा बनानेका निर्णय लिया है और लोकसभा चुनावोंका बहिष्कार करनेकी चेतावनी दी है । लोकसभा चुनावोंके बहिष्कार करनेका आह्वान करनेवाले फलक (बैनर) गांवके चारों ओर दिखाई देने लगे हैं, ऐसे ही एक फलकमें लिखा है, “रोड नहीं तो वोट नहीं” । लाहरू टिका गांव कांगडा संसदीय क्षेत्रके सुल्लाह विधानसभा क्षेत्रके अंतर्गत आता है ।


जब कांगडासे भाजपाके उम्मीदवार किशन कपूर और सल्लाहके विधायक विपिन सिंह परमारकी यात्रा अपने समर्थकोंके साथ दो अप्रैलको निकटके सडक मार्गसे गुजरा था, तब ग्रामीणोंने नारेबाजी की थी । कुमारने पूछा, ‘(प्रधानमन्त्री नरेंद्र) मोदी डिजिटल इण्डियाकी बात करते हैं; परन्तु गांवको सडक मार्गसे जोडे बिना ‘डिजिटल इंडिया’को कैसे पाया जा सकता है ?, जबकि हम २१वीं सदीमें है ।’

“कार्य न होनेपर जनताने इसी प्रकार ही बहिष्कार करना चाहिए, तभी एक सशक्त लोकतन्त्रका निर्माण सम्भव है; अन्यथा ५-५ वर्षोंमें दल परिवर्तितकर वोट देते हैं और कार्य कोई भी नहीं करता है । जागरूक नागरिक ही सच्चा लोकतन्त्र बना सकते है और यदि नागरिक जागरूक न हो तो लोकतन्त्रका कोई अर्थ नहीं होता है, वह केवल शोषणका माध्यम बन जाता है । ” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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