‘ट्विटर’ने किया विधानका सार्वजनिक रूपसे उल्लङ्घन, देहली उच्च न्यायालयने दिया एक सप्ताहका अन्तिम अवसर


२९ जुलाई, २०२१ 
        देहली उच्च न्यायालयने नूतन ‘आईटी’ नियमोंका पालन न करनेको लेकर पुनः ‘माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्वीटर’को फटकार लगाई है । ‘ट्विटर’द्वारा प्रस्तुत किए गए एक शपथपत्रको (एफिडेविटको) लेकर उसे फटकारा गया । इसमें उसने नूतन ‘चीफ कंप्लायंस’ अधिकारी और ‘ग्रीवांस’ अधिकारीकी नियुक्ति ‘अस्थायी कर्मचारी’के रूपमें करनेकी बात बताई थी । देहली उच्च न्यायालयने २८ जुलाई २०२१, बुधवारको ट्विटरको अन्तिम अवसर दिया ।
      देहली उच्च न्यायालयने आदेश दिया कि वे एक सप्ताहके भीतर एक अन्य शपथपत्र लेकर न्यायालयके समक्ष प्रस्तुत हो, जिसमें नूतन ‘आईटी’ नियमोंके अनुसार अधिकारियोंकी नियुक्तिके समूचे विवरण हों ।
      देहली उच्च न्यायालयने पूछा, “ये ‘Contingent Worker‘ क्या होता है ? इसके क्या अर्थ हुआ ? इससे ऐसा प्रतीत होता है जैसे उन अधिकारियोंकी चाकरी (ड्यूटी) किसी आकस्मिक व्ययपर आधारित हो । हमें ज्ञात ही नहीं कि इसमें ‘थर्ड पार्टी कांट्रेक्टर’ कौन है । हम नहीं समझे, आप इन शब्दोंका अर्थ समझाइए । ये विधानका पूर्णरूपेण उल्लङ्घन है । ऐसा नहीं चलेगा ।” ‘ट्विटर’ने अब पारदर्शी और स्पष्ट शपथ-पत्र प्रस्तुत करनेकी बात कही है ।
            उच्च न्यायालयका पुनः पुनः ‘ट्विटर’के विरुद्ध कठोर निर्णय देना और ‘ट्विटर’द्वारा कोई न कोई कारण बताकर नियमोंका उल्लङ्घन करना दर्शाता है कि भारतके विधानको लेकर उनको कोई भय नहीं है । भारतकी न्याय प्रणाली है ही ऐसी ! जहां एक १०० वर्षीय वृद्धकी न्यायकी आशामें मृत्यु हो जाती है; किन्तु उसे न्याय नहीं मिलता; यद्यपि ट्विटर तो एक विदेशी शक्ति है । वर्तमान न्याय प्रणालीसे समय रहते न्यायकी अपेक्षा व्यर्थ है । अब तो हिन्दू राष्ट्रमें ही त्वरित निर्णय सम्भव हो पाएगा; अतः हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अति शीघ्र होनी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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