‘एनआरसी’ प्रारूपसे अनुपस्थित हिन्दुओंको बसानेकी तैयारीमें है, भाजपा !


अगस्त २, २०१८

‘एनआरसी’ प्रारूपके पश्चात असमके ४० लाख लोगोंकी नागरिकतापर प्रश्नचिह्न लग गया है । वहीं, इस प्रकरणमें भाजपाके वरिष्ठ कार्यकर्ताओंने कहा कि उनका दल उन हिन्दुओंको सहायता उपलब्ध करवानेकी सिद्धता कर रहा हैं, जिनका नाम ‘एनआरसी’ प्रारूपकी अन्तिम सूचीमें नहीं आ पाएगा । ‘हफपोस्ट’के अनुसार भाजपाके वरिष्ठ कार्यकर्ताने बताया कि, “हम स्पष्ट कर रहे हैं कि हिन्दू अप्रवासियोंको पहले आश्रय शिविरोंमें रखा जाएगा और फिर ढांचा सज्ज कर उनका पुर्नवास किया जाएगा । यदि असमके लोग किसी प्रकारका मुद्दा बनाते हैं तो उन्हें दूसरे राज्योंमें भेजा जाएगा ।” एक अन्य भाजपा कार्यकर्ताने बतया कि शासन ‘एनआरसी’को (जिसमें तीन चरण हैं, प्रथम संज्ञान करना, दूसरा मतदाता सूचीसे नाम हटाना और तीसरा निर्वासन है) लेकर शीघ्रता नहीं कर रही है । अभी प्रथम चरण ही हुआ है, जिसमें लोगोंका संज्ञान किया गया है । यह शासनके लिए बडी उपलब्धि है; क्योंकि पूर्ववर्ती कांग्रेस और असम गण परिषदके शासनने ऐसा नहीं किया ।”

वहीं, दूसरी ओर भाजपाके महासचिव राम माधव दलके सन्देशको घर-घरतक पहुंचानेके लिए दूरदर्शन संचपर साक्षात्कार दिया । माधवने कहा, “कोई देश अपनी सीमाओंमें अवैध घुसपैठकी अनुमति नहीं देता है । हम तीन दशकोंसे अधिक समयसे इस समस्याको झेल रहे हैं । अब भारत इसे सहन नहीं कर सकता है, इस प्रकारका अवैध घुसपैठ अब आगे नहीं होना चाहिए !” साथ ही इस अवसरपर माधवने इस आरोपको नकार दिया कि बीजेपी साम्प्रदायिक है । उन्होंने कहा कि, “यह हिन्दुओं या मुस्लिमोंके बारेमें नहीं है । यह उन बांग्लादेशी घुसपैठियोंको लेकर है, जो यहांके बडे भू-भागपर अधिकार कर रहे हैं ।”

वहीं तृणमूल कांग्रेसकी अध्यक्षा और पश्चिम बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी इस पूरे प्रकरणका विरोध कर रही हैं । उन्होंने चेतावनी दी है कि इस प्रक्रियासे ‘रक्तपात और गृहयुद्ध’ हो जाएगा ! बनर्जीने कहा कि बीजेपी हिन्दू-मुस्लिम आधारपर बंगाली भाषी लोगोंके मध्य विभाजन कर रही है । भाजपाका लम्बे समयसे यह रूख रहा है कि हिन्दू आप्रवासियोंको शरणार्थियोंके रूपमें दर्जा दिया जाना चाहिए, जो धार्मिक उत्पीडनसे बचनेके लिए कथित रूपसे भारत चले गए थे । वहीं जबकि मुसलमान घुसपैठिए थे, जिन्हें निष्कासित किया जाना चाहिए । भाजपा शासनकी नीति ‘बांटो और करो’की है ।

बता दें कि ‘एनआरसी’की सूची जारी होनेके पश्चात संसदमें भी हंगामा हुआ । यद्यपि, इस प्रकरणपर केन्द्रीय गृहमन्त्री राजनाथ सिंहने कहा कि यह प्रारूप सूची है, अन्तिम सूची नहीं है । यदि किसीका नाम अन्तिम सूचिमें नहीं आता है, वे भी वह विदेशी न्यायाधिकरणमें जा सकता है । किसीके विरूद्ध बलपूर्वक कार्यवाही नहीं की जाएगी । कुछ लोग भयका वातावरण पैदा कर रहे हैं । अनुचित सूचना नहीं फैलानी चाहिए ।

स्रोत : जनसत्ता



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