केरलके सेंट जोसेफ कॉन्वेंटके कुएंमें पुनः मिला ‘नन’का शव
२० अप्रैल, २०२१
शुक्रवार १६ अप्रैलको दक्षिणी केरलके कुरीपुझा जनपदके सेंट जोसेफ कॉन्वेंटके कुएंमें एक ४२ वर्षीय ‘कैथलिक’ महिला मृत पाई गई । बताया जा रहा है कि प्रातःकालकी प्रार्थनामें ‘नन’ मेबल जोसेफके दृष्टिगत न होनेपर उनको ढूंढनेके प्रयास किए गए । वहीं करुणागप्पालीकी निवासी व ‘कांवेंट’में रहनेवाली ही एक अन्य महिलाने परिसरके भीतर बने कुएंमें जोसेफका शव देखा तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिसको दी । पुलिसने बताया कि प्राथमिक जांचमें यह ज्ञात हुआ है कि यह आत्महत्या ही है । अब ‘पोस्टमार्टम’के प्रतिवेदन व पूर्ण जांच होने के पश्चात ही अन्य जानकारी मिल सकेगी । उन्होंने यह भी बताया कि उनके कक्षसे एक आत्महत्या-पत्र भी प्राप्त हुआ है जिससे हो सकता है कि उन्होंने ही लिखा हो । वहीं सूत्रोंके अनुसार, स्वास्थ्य कारणोंके चलते उन्होंने यह पग उठाया होगा । केरलके ‘कांवेंट’के भीतर बने इस कुएंके भीतर इससे पूर्व भी अनेक ‘नन’ मृत पाई गई हैं । वहीं इसी वर्ष फरवरीमें एर्नाकुलम जनपदके वाझक्कलके ‘कॉन्वेंट’में रह रही ‘नन’ ‘कॉन्वेंट’के समीप एक खदानके भीतर मृत पाई गई थी । उल्लेखनीय है कि वर्ष १९८९ से अबतक लगभग २० ‘ननों’के शव इसी प्रकार कुएंमें प्राप्त हुए हैं ।
अध्यात्ममें तो अत्यधिक शक्ति होती है जो सर्व चिन्ताओंसे व्यक्तिको मुक्त करती है । वहीं अपने जीवनको अपने पन्थको समर्पित करनेवाली यह ‘नन’ अत्यधिक मानसिक कष्टोंसे त्रस्त होती हैं । इसीसे इनके आध्यात्मिक बलका ज्ञान होता है । केवल सनातन धर्म ही हमें अध्यात्मका सही अर्थ समझाता है व सुखसे आनन्दकी ओर हमें अग्रसर करता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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