फरवरी ११, २०१९
दुष्कर्मके आरोपका सामना कर रहे बिशप फ्रांको मुलक्कलके विरुद्घ प्रदर्शन कर रही ननोंने रविवार, १० फरवरीको आरोप लगाया कि बिशप अब भी रोमन कैथोलिक गिरिजाघरके ‘जालंधर डायोसिस’के प्रशासनिक कार्यमें दखल देते हैं । मुलक्कलको पोप फ्रांसिसने गिरिजाघरके सभी कार्योंसे मुक्त कर दिया है ।
प्रदर्शन कर रही ननोंका प्रतिनिधत्व करनेवाली ‘सिस्टर’ अनुपमाने कुराविलांगडमें बताया, “हमारा विश्वास है कि बिशप एंजेलो ‘जालंधर डायोसिस’के प्रशासक हैं; परन्तु जब हम ‘डायोसीस’के जन सम्पर्क अधिकारी और ‘जीसस कॉन्ग्रिगेशन’ प्रमुखके साथ पत्राचारको देखते हैं तो हमें शंका होती है कि बिशप फ्रांकोके पास अब भी शक्तियां हैं !”
ननोंका यह वक्तव्य ‘जालंधर डायोसिस’के जन सम्पर्क अधिकारी फादर पीटर कुवमपुरमकी ओरसे दिए वक्तव्यके एक दिवस पश्चात आया है । कुवमपुरम कथित रूपसे बिशप मुलक्कलके निकटवर्ती हैं । दरअसल बिशप एंजेलो रूफीनो ग्रासियसकी ओरसे ननोंको जारी एक ‘ईमेल’पर स्पष्टीकरण देते हुए कुवमपुरमने एक वक्तव्य दिया था ।
इसमें ननने ५४ वर्षके बिशपपर २०१४ से २०१६ के मध्य दुष्कर्म और अप्राकृतिक यौनाचार करनेका आरोप लगाया था । जून २०१८ में कोट्टयाम पुलिसको लिखितमें दी गई अपनी परिवादमें ननने आरोप लगाया था कि बिशपने मई २०१४ में कुराविलंगाड विश्राम गृहमें उससे दुष्कर्म किया था और बादमें उनके साथ निरन्तर यौन शोषण करते रहे ।
“एक दुष्कर्मका आरोपी न्यायालयसे छूट जाता है और छूटनेके पश्चात भी सभी कार्यभार सम्भालता है, वहीं हिन्दू सन्तोंको निर्दोष होनेपर भी कारावाससे बाहरतक नहीं आने दिया जाता है, यह हास्यास्पद ही है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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