हिन्दू देवी-देवताओंको अपशब्दपर ‘ब्लॉक’ क्यों नहीं करते ? ‘ट्विटर’को देहली उच्च न्यायालयने लगाई फटकार
२९ मार्च, २०२२
‘ट्विटर’के ‘हिपोक्रेटिक’ व्यवहारको देखते हुए देहली उच्च न्यायालयने सोमवारको (२८ मार्च २०२२ को) ‘सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म’पर टिप्पणी की । न्यायायलने कहा, “जब ‘ट्विटर’ अमेरिकाके पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपतकका खाता प्रतिबन्धित कर सकता है तो फिर हिन्दू देवी और देवताओंके बारेमें जो अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं, उन खातोंपर कार्यवाही क्यों नहीं करता ? यदि यही बात किसी अन्य ‘मजहब’के विरुद्ध जाती तो आप गम्भीर होते ।”
न्यायालयने ‘ट्विटर’से उत्तर मांगा है, जिसमें उन्हें बताना होगा कि किसी खातेको स्थायी रूपसे ‘ब्लॉक’ करनेकी उनकी क्या प्रक्रिया है ? अब ‘ट्विटर’को उत्तरमें अपनी ‘पॉलिसी’ समझानी होगी । अब ये घटना ६ सितम्बरको सुनी जाएगी ।
बता दें कि ये याचिका न्यायालयमें अधिवक्ता आदित्य देशवालने डाली थी, जिसमें ‘ट्विटर हैंडल’ ‘एथिस्ट रिपब्लिक’का उल्लेख है । याचिकामें कहा गया है कि सभी परिवारोंके पश्चात खाता न तो प्रतिबन्धित हुआ और न ही उसके ऊपर कोई कार्यवाही हुई ।
‘ट्विटर’ जैसे ‘सोशल मीडिया प्लेटफार्म’ न्यायालयके कहनेपर ही उत्तर देते है, अन्य उपयोगकर्ताओंके (यूजर्सके) लिए उनके पास ‘रिपोर्ट एवं ब्लॉक’ विकल्प शेष रहता है । ऐसे मनमानी शैलीसे कार्य करनेवाले ‘ट्विटर’ सहित अन्य ‘प्लेटफॉर्म्स’पर कठोर नियम क्रियान्वित किए जाने चाहिए, जिससे वे जनमानसके हितमें रहकर कार्य करें । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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