पाकिस्तानी ध्वजसे बनी कमीज पहने छात्रोंके चित्र डालनेके प्रकरणमें एक और बन्दी बनाया गया !


फरवरी २८, २०१९


सामाजिक जालस्थलपर उस चित्रको प्रेषित करनेके प्रकरणमें झारखण्डके धनबादसे एक और आरोपीको बन्दी बनाया गया है, जिसमें कथित रूपसे पाकिस्तानके ध्वजसे बनी कमीज पहने ११ युवकोंको दिखाया गया है । इसके साथ ही इस प्रकरणमें बन्दी बनाए लोगोंकी कुल संख्या छह हो गई है !


धनबादके निरसा थानाके प्रभारी सुषमा कुमारने बताया कि गुरुवार, २८ फरवरीको किसी अप्रिय घटनाका समाचार नहीं मिला है । रांचीसे १८० किलोमीटर पूर्वमें बैदपुर गांवमें धारा-१४४ लगाई हुई है । एक पुलिस अधिकारीने बताया कि अन्य पांच आरोपियोंकी खोजमें विभिन्न स्थानोंपर छापेमारी की जा रही है ।

निरसा प्रखण्डमें निषेधाज्ञा लगा दी गई थी, जब मंगलवारको पाकिस्तानके बालाकोटमें ‘जैश-ए-मोहम्मद’के प्रशिक्षण शिविरपर आक्रमणका उत्सव मना रहे लोगोंने सामाजिक जालस्थलपर ११ स्थानीय युवकोंकी पाकिस्तानके राष्ट्रीय ध्वजसे बनी कमीज पहने चित्र देखा ! उग्र भीडने चित्रमें दिख रहे ११ युवकोंके घरोंको घेर लिया था और उनमें तोडफोड की थी ।


राजद्रोहके आरोपोंके अतिरिक्त सभी आरोपियोंके विरुद्घ आईपीसीकी धारा ‘१५३-ए’ (विभिन्न समूहोंके मध्य शत्रुताको प्रोत्साहन देना) और ‘२९५-ए’के (दूसरोंकी धार्मिक भावनाएं आहत करने) अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया था ।

 


“न केवल बडे, वरन छात्र भी भारतमें रहकर पाकिस्तानके प्रति प्रेम प्रकट कर रहे हैं । अनेक स्थानोंसे ऐसे राष्ट्रद्रोहके अनेक प्रकरण सामने आ रहे हैं । कठिन समयकी स्थितिमें आज कोई धर्मान्ध पाकिस्तानके ध्वज फहरा रहा है तो कोई उसकी जय-जयकार कर रहा है; अतः स्पष्ट है कि ये पाकिस्तानप्रेमी विकट स्थितिमें देशके विरुद्घ अवश्य जाएंगें ! सम्भवतः अब तो धर्मनिरपेक्षोंके नेत्रोंपर बंधी पट्टियां खुलेंगीं और उन्हें सत्य दिखेगा ! अब भी यदि हिन्दू सत्य देख न जागे तो उन्हें मृत ही समझना चाहिए; क्योंकि अपने सैनिकोंके शवोंपर राष्ट्रद्रोह करनेवालोंके विरुद्ध भी जिनका विवेक मृत हो जाता है, वह मृत समझने योग्य ही है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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