‘अमर जवान ज्योति’के पास महिलाने लगाए पाकिस्तान जिंदाबादके उद्घोष !!


जनवरी १३, २०१९

गणतन्त्र दिवसकी तैयारियोंको देखते हुए जहां ‘इंडिया गेट’पर कडी सुरक्षा है, वहीं रविवारको इस सुरक्षा घेरेको तोडकर एक महिला अमर जवान ज्योतिके पास पहुंच गई और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’के नारे लगाने लगी ! महिलाने सलवार सूटके ऊपर फिरन पहन रखी थी, जो कश्मीरके लोग शीत ऋतुमें पहनते हैं । यह महिला राजपथके किनारे बने लॉनसे होती हुई ‘अमर जवान ज्योति’के पास पहुंच गई । यह देखकर पहले तो वहां तैनात सैनिकोंके कान खडे हो गए; परन्तु महिलाके कृत्योंको देखकर उन्होंने अनुमान लगा लिया कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है !


उधर, महिलाको वहांसे हटानेके लिए सुरक्षाकर्मियोंको अधिक मेहनत करनी पडी । अमर जवान ज्योतिके आसपास कोई महिला सुरक्षाकर्मी नहीं होनेके कारण पुलिस और सैनिक भी महिलाको रोकनेसे बचते दिखे । जब महिलाने वहां लगे गमलेको गिरा दिया और सेनाके एक अधिकारीको पीछेसे धक्का दे दिया तो जलसेनाके एक अधिकारीने वहां तैनात दिल्ली पुलिसके एक अधिकारीसे महिलाको हटानेके लिए कहा । उसने प्रयास किया तो महिलाने हाथ झटककर स्वयंको छुडा लिया और इधर-उधर घूमने लगी । बादमें वहां एक महिलाकी सहायतासे उसे पकडकर अमर जवान ज्योतिसे दूर ले जाया गया ।

पुलिसके अनुसार, महिलाके पास एक थैला था, जिसमें कुछ वस्त्रोंके अतिरिक्त मुम्बईकी ‘बेस्ट बस सेवा’का नवम्बर २०१६ में बना एक ‘पास’ और पाकिस्तानके स्वात क्षेत्रमें स्थित एक ‘ऑटो-मोबाइल रिपेयरिंग वर्कशॉप’का कार्ड और कुछ अन्य वस्तुएं भी मिलीं । इनसे ज्ञात हुआ कि महिलाका नाम सुल्ताना खान है और उसकी आयु करीब ३५-४० वर्ष है । पूछताछमें महिला अधिक कुछ नहीं बता पा रही थी । बार-बार यही कह रही थी कि उसे पाकिस्तान जाना है । वह स्वयंको कभी मुम्बई की, तो कभी हैदराबादकी रहनेवाली बता रही थी । पुलिसवालोंने जब पूछा कि वह दिल्ली कैसे आई ?, तो उसने कहा कि रेलयानमें बैठकर यहां पहुंची; परन्तु वह कहांसे बैठी थी ?, इसका न तो वह उत्तर दे पाई और न ही उसके पाससे कोई टिकट मिला । पुलिसने उसे आरएमएल चिकित्सालयमें प्रविष्ट करवाया है, जहां चिकित्सक उसकी मानसिक स्थितिपर दृष्टि रखे हुए हैं ।

 

“महिलाकी यह स्थिति मानसिक विक्षिप्तता न होकर क्या उस इस्लामिक विचारधाराका प्रतीक नहीं ?, जो भारतमें रहते हुए भी पाकिस्तान जिन्दाबाद बोलना सिखाती है, अन्यथा मानसिक विक्षिप्त तो कई हैंं देशमें; परन्तु उन्होंनें तो कभी ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद’ नहीं बोला !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

 

स्रोत : नभाटा



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