शिवत्वहीन आधुनिक विज्ञान प्रतिदिन एक नूतन अविष्कार कर रहा है और आजके विज्ञाननिष्ठ लोग उसे बिना सोचे समझे तुरंत आचरणमें लाते हैं | कुछ कालके उपरान्त आधुनिक विज्ञान अपने उन्हीं अविष्कारोंके दुष्प्रभावके साथ उपस्थित होता है और तबतक निधर्मी समाज उसके दुष्प्रभावसे पीडित हो चुका होता है ! ऐसा ही एक अविष्कार है, ‘नॉन स्टिक’ बर्तन ! कितना अच्छा हम लोहे एवं मिट्टीके तवेपर रोटी बनाते थे | अकस्मात काला विषयुक्त टेफलोनवाला पात्र हमारे घरोंकी शोभा बन गया और वह इतना सुप्रसिद्ध इसलिए भी हो गया क्योंकि उसे धोनेमें अधिक कष्ट नहीं होता है ! वस्तुत: रोटी हेतु लोहेके या मिट्टीके तवेका उपयोग स्वास्थ्यकी दृष्टिसे सर्वोत्तम होता है; अतः इसका ही हमें उपयोग करना चाहिए | ‘नॉन स्टिक’ बर्तनोंके हानिके विषयमें आपको पूर्वके लेखों एवं सत्संगमें बता ही चुके हैं ! ध्यान रखें, पारम्परिक रीतिसे भोजन बनानेकी सर्व पद्धति स्वास्थ्यके लिए सर्वोत्तम होती हैं | अतः विज्ञापनके बहकावेमें आकर किसी भी वैज्ञानिक वस्तुका तुरंत उपयोग न करें !
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