पाक कला (भाग-६)


गेहूंके आटेका सेवन करते समय उसमें रागी (मडुआ), जौ, बाजरा, ज्वार या मक्केके आटेको मिलाना चाहिए, इससे रोटीमें स्वास्थ्यवर्धक गुणोंमें वृद्धि होती है | गेहूंको मोटे अनाजमें नहीं गिना जाता है, इसका प्रचलन हरित क्रान्तिके पश्चात हुआ है; कहा जाता है कि यह भारतका अन्न है ही नहीं ! भारतमें मोटे अनाजका जिसमें चावल भी है, इनका प्रचलन था और इसके सेवनसे हमें उदर रोग नहीं होते थे ! साथ ही हम मात्र मोटे अनाजकी भी रोटी बना सकते हैं, मात्र उन्हें गूंदते समय गर्म पानीका प्रयोग करना चाहिए | आजकल मोटे अनाज मिश्रित आटा सर्वत्र पुनः उपलब्ध होने लगा है ! मोटे अनाजकी रोटी बनाते समय पलथन हेतु जौके आटेका उपयोग करना चाहिए |



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