बांग्लादेशसे भारतमें घुसा, ‘पीर-मौलाना’ बन महिला संग रहता था पाकिस्तानी आतङ्की, देहलीपर आक्रमणके लिए यमुनाकी रेतमें रखे थे अस्त्र-शस्त्र
१२ अक्टूबर, २०२१
देहली ‘पुलिस’की ‘स्पेशल सेल’ने सोमवारको (११ अक्टूबर) देहलीके रमेश ‘पार्क’से मोहम्मद अशरफ अर्थात अली नामके एक पाकिस्तानी आतङ्कीको बन्दी बनाया था, जो गत एक दशकसे अधिक समयसे मिथ्या अभिज्ञान पत्रपर देशमें रहा था । अली आतङ्कियोंके ‘स्लीपर सेल’के रूपमें देशमें आतङ्की घटनाओंको परिणति देनेके प्रयास में था ।
आतङ्की अलीने बांग्लादेशके मार्गसे भारतमें प्रवेश किया था और भारत आकर उसने यहांका पारपत्र (पासपोर्ट) भी बनवा लिया । देहली-‘एनसीआर’में ‘पीर-मौलाना’के रूपमें ‘झाड-फूंक’का कार्य करता था । वह देशके जिन-जिन नगरोंमें रहा, वहां ‘मौलाना’ बनकर ही वह रहता था । उसने भारतका पारपत्र भी बनवा लिया है । ‘पुलिस’के अनुसार, आतङ्की अली देहलीके ‘स्लीपर सेल’का मुखिया था और भारत आनेवाले आतङ्कियोंको अस्त्र-शस्त्र और साधन उपलब्ध करवाता था ।
‘पुलिस’के अनुसार, वह ४० वर्षका है और उसने एक भारतीय महिलासे विवाह भी किया है; यद्यपि, पूछताछके मध्य उसने विवाहकी बातको मना किया; किन्तु उसके पश्चात, उसने कहा कि वह एक महिलाके साथ रहता था और विगतकालमें उससे पृथक (अलग) हो गया ।
‘पुलिस’ने छापेमारीके मध्य उसके स्थानसे, एक ‘एके’-४७ ‘राइफल’के साथ एक अतिरिक्त ‘मैगजीन’ व ६० ‘राउंड’, एक हथगोला, ५० ‘राउंड’के साथ २ अत्याधुनिक ‘पिस्टल’ हस्तगत की थी । ये अस्त्र-शस्त्र उसने देहलीके कालिंदी कुंजके निकट यमुना नदीके किनारे बालूके नीचे दबा रखे थे ।
समय रहते आतङ्कियोंके उद्देश्यपर पानी फेरना और उन्हें बन्दी बनाना, यह सुरक्षा अभिकरणों और पुलिसकी एक बडी उपलब्धि है, जिसके लिए उन सभीका अभिनन्दन है । पाकिस्तानके ‘स्लीपर सेल’ भारतमें दशकोंसे रह रहे है । ऐसेमें देश विरोधी प्रत्येक गतिविधिपर ध्यान देनेकी आवश्यकता है और ये कार्य ‘पुलिस’के साथ-साथ देशवासियोंका भी है; अतः हम सभीको सतर्क रहना होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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