अक्तूबर ३०, २०१८
पाकिस्तानकी नवनिर्वाचित सरकारके गठनके पश्चात् भारतीय सेनाने आतंकियोंके विरुद्घ एक बडी कार्यवाही की है । भारतीय सेनाने पीओकेमें आतंकी शिविरोंपर एक बडा आक्रमण किया है । भारतीय सेनाका लक्ष्य पीओकेमें हजीरा और रवालकोट सेक्टर था । ये क्षेत्र आतंकका गढ है और पाकिस्तान यहींसे आतंकियोंकी घुसपैठ कराता है । यद्यपि, इस वर्ष घुसपैठ और आतंककी सर्वाधिक घटनाएं हुई; लेकिन प्रत्येक बार भारतीय सेनाने धैर्यसे काम लिया; लेकिन इस बार भारतीय सेनाने पीआेकेमें आतंकियोंपर कडी कार्यवाही की है
भारतने अपनी इस कार्यवाहीसे यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान अब नहीं जागा तो इसके भयावह परिणाम होंगे ! पाकिस्तानी सेनाने सीमासे आतंकियोंको भारतमें प्रवेशके साथ कई बार नियन्त्रण और सीमा रेखाका भी अतिक्रमण किया है । जम्मू कश्मीरमें भारत दो मोर्चोंपर एक साथ जूझ रहा है । पहला आतंकी घुसपैठ और दूसरा सीमा पारसे पाकिस्तान सेनाका निरन्तर आक्रमण ।
यदि राज्यमें गत तीन वर्षोंमें पाकिस्तानी गोलीबारीकी घटनाआेंपर दृष्टि डाले तो यह विवरण चौंकाने वाले हैं ! वर्ष २०१८ में पाकिस्तानकी ओर सीमा रेखापर सर्वाधिक घटनाएं गोलीबारीकी हुई हैं । सात माहमें पाकिस्तानने १४३५ बार सीमापर गोलीबारी की ! इस वर्ष वह निरन्तर भारतके धैर्यकी परीक्षा लेता रहा है । गत वर्षकी तुलनामें इस वर्ष गोलीबारीकी घटनाओंमें अधिक वृद्धि हुई है । वर्ष २०१७ में पाकिस्तानी सेनाने ९७१ बार सीमापर गोलीबारीकी घटनाएं की हैं ।
१९९० के दशकमें दोनों देशों सीमा रेखापर शांतिके लिए आगे आए । इसके अन्तर्गत भारत-पाकिस्तानके मध्य एक सन्धि हुई । दोनों देशोंके मध्य नियन्त्रण रेखा और एलओसीपर एक ‘बफर जोन’की स्थापना की गई । इसके लिए नियम निर्धारित किए गए । इस सन्धिके अन्तर्गत यह निर्धारण हुआ कि नियंत्रण रेखाके एक किलोमीटरके भीतर दोनों देश कोई विमान या ड्रोन नहीं उडा सकते । इसके साथ एलओसीके लिए भी कुछ नियम निर्धारित किए गए । एलओसीके दस किलोमीटरकी सीमामें कोई फिक्स पंखों वाला विमान प्रवेश नहीं कर सकता है; लेकिन पाकिस्तान अपने ही बनाए नियमोंकी धज्जियां उडाता रहा है ।
स्रोत : दैनिक जागरण
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