सितम्बर ६, २०१८
पाकिस्तानके एक न्यायालयने बुधवारको लाहौर प्रान्तीय शासनको निर्देश दिया कि वह शादमान चौकका नाम बदलकर स्वतन्त्रता सेनानी भगत सिंहके नामपर रखनेके सम्बन्वमें निर्णय करे । ज्ञात है कि ब्रिटिश शासनके समय ८७ वर्ष पूर्व स्वतन्त्रता सेनानी सरदार भगत सिंहको यहीं फांसी दी गई थी । भगत सिंह और उनके मित्र राजगुरू और सुखदेवको पूर्ववर्ती लाहौर कारावासमें २३ मार्च १९३१ को फांसी दी गई थी । शादमान चौराहा उसी स्थान पर बना हुआ है ।
लाहौर उच्च न्यायालयके न्यायाधीश शाहिद जमील खानने भगत सिंह मेमोरियल फाउण्डेशनके अध्यक्ष इम्तियाज राशिद कुरैशीकी याचिकापर सुनवाई करते हुए लाहौरके उपायुक्तको आदेश दिया कि वह वैधानिक सीमामें रहते हुए शादमान चौकका नाम बदलकर भगत सिंहके नामपर रखनेके सम्बन्धमें निर्णय करें । याचिका प्रविष्ट करने वालेका कहना है कि भगत सिंह स्वतनवत्रता सेनानी हैं । उन्होंने अपने साथियोंके साथ मिलकर स्वतन्त्रताके लिए प्राण दिए है ।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तानके संस्थापक आजम मोहम्मद अली जिन्नाने भी सिंहको श्रद्धाञ्जलि दी थी और कहा था कि उन्होंने पूरे प्रायद्वीपमें भगत सिंह जैसा बहादुर व्यक्ति नहीं देखा । उन्होंने कहा, यह न्यायके दृष्टिकोणसे उचित होगा कि शादमान चौकका नाम भगत सिंहके नामपर रखा जाए ।
“एक ओर पाकिस्तान सदृश राष्ट्र भगत सिंहको सम्मान देना चाहता है और दूसरी ओर हिन्दुस्तानके राष्ट्रद्रोही उन्हें आतंकी बताते हैं !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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