मार्च ३१, २०१९
पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनोंने जम्मू-कश्मीरमें अब विद्यालयके बच्चोंका आश्रय लेना आरम्भ कर दिया है । सुरक्षा एवं जांच विभागने इस प्रकरणमें एक बडे गुटको उजागर किया है । जम्मू-कश्मीरके १७८ उच्च माध्यमिक विद्यालय और ४१ उच्च विद्यालय ऐसे मिले हैं, जहां आतंकी संगठन अपने ‘स्लीपर सेल’केद्वारा बच्चोंको भ्रमितकर आतंककी राहपर ले जानेका प्रयास कर रहे हैं ।
‘फोन टैपिंग’केद्वारा जो बातें सामने आई हैं, उसके अनुसार इस गिरोहमें विद्यालयके अध्यापक, चतुर्थ श्रेणी कर्मी और पांच शासकीय विभाग, वन, लोक निर्माण, श्रम विभाग, मंडी और परिवहन सम्मिलित हैं । आतंकी संगठनोंने सभी विद्यालयोंमें ‘स्लीपर सेल’के लिए भिन्न-भिन्न सांकेतिक शब्द (कोड) जारी किए हैं । छात्रोंको भारतीय सुरक्षाबलोंके विरुद्घ भडकाकर उन्हें पहली अंशिकाके (किश्तके) रूपमें पन्द्रह सौ रुपये भी देते हैं ।
पुलवामा आक्रमणके पश्चात सुरक्षाबलोंने कश्मीरमें बडा अन्वेषण अभियान आरम्भ किया था । सुरक्षाबलोंको यह समझ नहीं आ रहा था कि उनके अन्वेषण अभियानकी सूचनाएं आतंकियोंतक कैसे पहुंच रही हैं ? आतंकियोंको शस्त्र, विस्फोटक और दूसरी सहायता भी मिल रही हैं ।
‘एनआईए’ने पुलवामा आक्रमणकी जांचके समय पता लगाया कि जम्मू कश्मीरमें पाकिस्तानी आतंकियोंके वृहद स्तरपर ‘स्लीपर सेल’ विद्यमान हैं । यद्यपि ‘लश्कर-ए-तैयबा’, ‘हिजबुल मुजाहिदीन’, ‘जैश-ए-मोहम्मद’ और ‘हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी’, जैसे आतंकी संगठनों व उनके ‘स्लीपर सेल’की आशंका तो जांच विभागको पहले भी था; परन्तु छात्रोंका दुरुपयोग, यह एक रहस्य ही बना हुआ था । दो सप्ताह पूर्व जांच विभागने गृह मन्त्रालयको एक विवरण भी सौंपा है ।
जांच विभागके अधिकारियोंका कहना है कि आतंकी संगठन छात्रोंको अव्यस्क होनेके कारण अपना ‘स्लीपर सेल’ बना रहे हैं । वे जानते हैं कि यदि सौ बच्चोंमेंसे बीस बच्चे भी लंबे समयतक आतंकी संगठनके साथ जुडे रहे तो वे सुरक्षाबलोंको हानि पहुंचा सकते हैं और इनपर किसीको शंका नहीं होगी और ये पकडे गए तो ‘जुवेनाइल अधिनियम’में छूट जाएंगें ।
आतंकियोंकी ऐसी सोच है कि बच्चोंको जो भी काम सौंपा जाएगा, वे उसे सरलतासे पूरा कर देंगें । गत माह जम्मूमें बस अड्डेपर जो विस्फोटक फेंका गया था, उसमें ऐसे ही बच्चोंका दुरूपयोग किया गया था । जम्मू-कश्मीरमें ‘स्लीपर सेल’को धनकी सहायता देनेवाले कथित पृथकतावादी एवं दूसरे असामाजिक तत्त्व बच्चोंके आधार कार्डकी प्रति उनके थैलेमें डलवा देते हैं । जो भ्रमणभाष अवरोधन (इंटरसेप्ट) किया गया, उसमें पाकिस्तानसे आतंकी संगठनका एक सदस्य कह रहा है कि बच्चोंको जिहादकी जानकारी देना आरम्भ करो । विद्यालयके पश्चात उन्हें खेलके बहाने जंगल या दूसरी किसी वीरान स्थानपर बुलाओ । यदि पैसे अल्प पड रहे हों तो ‘स्लीपर सेल कोड वर्ड’ (साहबजादाको) बोल देना । बच्चोंको जेहादके यन्त्र (कोड वर्ड) अर्थात शस्त्रोंकी जानकारी भी दे दो ।
जो विद्यार्थी उच्च माध्यमिक स्तरपर हैं, उन्हें प्रत्येक माह एक निर्धारित राशि दी जाए । बच्चोंको एक छोटीसी पुस्तिका भी दी जाती है, जिसमें आतंकी संगठन स्वयंके बारेमें बताते हैं । वे स्वयंको कश्मीरके लोगोंका साथ देनेवाले बताते हैं । जम्मू-कश्मीर पुलिसके एक अधिकारीका कहना है कि पाकिस्तानका इन बच्चोंको आतंककी राहपर ले जानेका उद्देश्य स्पष्ट है । यदि कभी इन बच्चोंने बडी दुर्घटना की या आतंकियोंकी सहायता की तो अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर यह कहा जा सकेगा कि इसमें पाकिस्तानका हाथ नहीं है । ये सब भारतीय बच्चे हैं ।
अनंतनाग-२५ स्कूल, बांदीपोरा-१५ उच्च और आठ उच्च माध्यमिक, बारामुलामें ३४ उच्च और १४ उच्च माध्यमिक, बडगांवमें १८ उच्च माध्यमिक विद्यालय, डोडामें ११, कठुआमें पांच, किश्तवाडमें १३, कुलगांवमें आठ, कुपवाडामें १७ उच्च व २१ उच्च माध्यमिट, शोपियांमें २१ और पुलवामामें ११ उच्च विद्यालय सम्मिलित हैं ।
जांच विभागके अनुसार, चतुर्थ श्रेणीको ‘स्लीपर सेल’के रूपमें प्रयोग किया जा रहा है । कई स्थानोंपर अध्यापक भी आतंकी संगठनोंके संपर्कमें हैं ! इसके अतिरिक्त कुछ वाहन चालक भी ‘स्लीपर सेल’ बने हैं !!
पृथकतावादी नेता इन विभागों और आतंकी संगठनोंके मध्यका सम्बन्धका काम करते हैं । एनआईए, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, अर्धसैनिक बल, आईबी, रॉ, एनटीआरओ और ईडी जैसे विभागोंको संयुक्त रूपसे इस अभियानमें लगाया गया है ।
“ऐसा नहीं है कि केवल बालक ही इस कार्यके लिए प्रयोग किए जा रहे हैं और अकेले बालक किए भी कैसे जा सकते हैं, जबतक कोई बडा साथ न हो । ऐसा प्रतीत होता है कि कश्मीरके प्रत्येक क्षेत्रका व्यक्ति आतंकी गतिविधियोंमें संलिप्त है । चालक, अध्यापक, प्राध्यापक, मौलवी, मस्जिदें, पृथकतावादी नेता और अन्तमें बच्चे ! कुछ समय पूर्वतक इन्हीं पृथकतावादी नेताओंको सुरक्षा प्राप्त थी और तो और हम इन्हें नेता भी कह रहे थे, जिनपर प्रतिबन्धका विरोध महबूबाजी कर चुकी हैं ! मदरसे तो संलिप्त थे ही यहां तो सभी विद्यालय भी “स्लीपर सेल’ बने हैं !! जहां बालकोंको शिक्षा देकर एक योग्य नागरिक बनाना चाहिए, वहां उसे जिहाद सीखाकर आतंकी बनाया जा रहा है और विचित्र है कि आजतक ये सभी धन भी हमसे ही पा रहे थे !! मोदी शासनने जो कार्य गत १ वर्षमें किया है, १९४७ से २०१९ तक क्या हमारा सुरक्षा विभाग व शासकगण इसका पता क्यों नहीं लगा पाए, कांग्रेस इसका उत्तर दे !! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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