पाकिस्तानका दुस्साहस, ‘फर्जी डाक टिकटों’पर कश्मीरी पण्डितोंका चित्र लगाया !!


अक्तूबर १, २०१८

कश्मीरी पण्डितोंने पाकिस्तानद्वारा कश्मीरी पण्डितोंके चित्र वाले डाक टिकट जारी करनेपर विरोध प्रकट किया है । पाकिस्तानके ‘जाली डाक टिकट’ जारी करनेको लेकर कश्मीरी पण्डितोंने संयुक्त राष्ट्र महासचिवको पत्र लिखा है । पाकिस्तान डाक विभागने कश्मीरीमें कथित मानवाधिकार उत्पीडनको लेकर २० डाक टिकट जारी किए हैं ।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव, एन्तोनियो गुतारेसको लिखे अपने पत्रमें कश्मीरी पण्डितोंका कहना है कि पाकिस्तानका कश्मीरपर डाक टिकट जारी करना कश्मीरीको दलदलमें धकलेनेका दुर्भावनापूर्ण प्रयास है । उन्होंने कहा कि इन डाकटिकटोंमें जारी एक चित्र २०१० में ‘जंतर मंतर’के प्रदर्शनका है, जिसमें :कश्मीरी पण्डित संगठन रूट्स इन’ने कश्मीरके विज्ञापन पटके आश्रयपर (बैनरतले) शान्तिपूर्ण प्रदर्शन किया था ।

कश्मीरी पण्डितोंने पाकिस्तानको फर्जी चित्र जारी करके विश्वभरमें अपनी परियोजना फैलानेको लेकर लताड लगाई है । अपने पत्रमें उन्होंने लिखा है कि इस्लामी कट्टरताके चलते उन्हें अपना घरबार छोडकर कश्मीरसे जाना पडा । उन्होंने इस डाक टिकटकी चित्रमें सम्मिलित सभी ९ लोगोंका संज्ञान भी जारी किया । डाक टिकटमें पाकिस्तानने ‘कश्मीरमें अत्याचार’ और ‘लापता लोग’ जैसे शीर्षक (कैप्शन) भी प्रयोग किए हैं !

‘रूट्स इन कश्मीर’का कहना है कि भारतद्वारा मानवाधिकारोंके उल्लंघनका फर्जी प्रचार फैलानेके लिए कश्मीरी पण्डितोंके चित्रका प्रयोग कर पाकिस्तानने ‘जलेपर नमक छिडकने’ जैसा कार्य किया है ! वास्तवमें कश्मीरके मूलनिवासी, कश्मीरी पण्डितोंको भगाकर अधिकारोंका उल्लंघन पाकिस्तानने किया है !

उन्होंने संयुक्त राष्ट्रके महासचिवसे विनती की है कि संयुक्त राष्ट्र इसमें हस्तक्षेप करे, साथ ही पाकिस्तान सरकारको पत्र लिख कर डाक टिकट वापस लेनेके लिए दबाव बनाए । वहीं उन्होंने यह भी लिखा है कि पाक सरकार कश्मीरी पण्डितोंपर हिंसाको लेकर क्षमा भी मांगे । पाकिस्तान डाक विभागने २४ सितम्बरको ‘भारतके दमनके विरुद्घ’ लड रहे कश्मीरियोंके प्रति एकजुटता दिखानेके लिए ये डाक टिकट जारी किए थे ।


“पाकिस्तानका दुस्साहस देखिए, अनुचित कार्य कर क्षमा प्रार्थना तो दूर गया, बल्कि कश्मीरी पण्डितोंका अपमान कर रहा है । जिसके अनुवांशिक गुणोंमें क्षमा, दया, भावना, प्रेम आदि गुणोंका अंश भी न हो, ऐसे आतंकके संरक्षक राष्ट्रसे क्या आशा भी क्या की जा सकती है !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



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