पाकिस्तानको विभाजित कर सिंधुदेश बनानेकी मांग करते हुए सहस्रों पाकिस्तानियोंने निकाली विशाल रैली
१९ जनवरी, २०२१
पाकिस्तानके बलूचिस्तानके पश्चात अब सिंधमें भी स्वतन्त्रताके लिए आन्दोलन तीव्र हो गया है । १७ जनवरीको सिंध प्रान्तके सन्न जनपदमें सहस्रों प्रदर्शनकारियोंने पाकिस्तानसे स्वतन्त्रताकी मांग करते हुए सडकोंपर विशाल रैली निकाली । इसी मध्य उन्होंने हाथमें भारतके प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीका छायाचित्र भी लिया हुआ था । लोगोंने ‘आजादी-आजादी’के उद्घोषकर पाकिस्तानसे पृथक हो स्वतन्त्र सिंधुदेश बनानेकी मांग की । लोगोंके हाथोंमें अन्य वैश्विक राजनेताओंके भी छायाचित्र थे, जिसे वह लहरा रहे थे । इसमें जर्मनीके ‘चांसलर’ एंजेला मर्केल रूसके राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन व अमेरिकाके नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बिडेनके छायाचित्र सम्मिलित थे । प्रदर्शनकारियोंने वैश्विक राजनेताओंसे इस प्रकरणमें हस्तक्षेपकर सिंधुदेशके गठनकी मांग की है । पूर्वमें भी सिंध समुदायद्वारा स्वतन्त्रताकी मांगको लेकर जन आन्दोलन किए गए हैं, जिसमें जीएम सैयदको आधुनिक सिंध राष्ट्रवादका जनक माना जाता है । इस ‘रैली’का नेतृत्व ‘सिंध मुत्तहिदा महाज’के अध्यक्ष शफी मोहम्मद गुलफाम सहित अन्य राजनेताओंने किया था । बुरफातने सिंधका उद्योग, दर्शन, समुद्री यातायात व गणित आदिके क्षेत्रोंमें योगदानके विषयपर चर्चा करते हुए, किस प्रकार पाकिस्तानद्वारा ‘फासीवादी इस्लामी’ प्रसारितकर सिंधके नागरिकोंको बन्दी बना रखा है ? इसपर प्रकाश डाला । उनके अनुसार, पाकिस्तान सिंधके संसाधनोंका दुरुपयोग करते हुए मानवाधिकारोंका भी निरन्तर उल्लङ्घन करनेमें लिप्त है । सिंधके अनेक सङ्गठन स्वतन्त्रताके समर्थनमें हैं व अन्तरराष्ट्रीय स्तरपर भी इसकी मांग उठाते रहते हैं । उन्होंने यह भी कहा कि सिंध पाकिस्तानका भाग नहीं रहना चाहता, जो अपनी दमनकारी नीतियोंपर ही चलता है । उल्लेखनीय हैं कि गत वर्षोंसे पाकिस्तानके बलूचिस्तान व पाक अधिकृत कश्मीरसे भी इसी प्रकार के प्रदर्शनोंके समाचार आते रहते हैं । वहांके नागरिकोंद्वारा निरन्तर स्वतन्त्रताकी मांगको लेकर जन आक्रोश व्यक्त किया जाता है ।
समाचारसे स्पष्ट होता है कि किस प्रकार पाकिस्तान अपनी दमनकारी नीतियोंद्वारा वहांके निवासियोंका उत्पीडन करता है । अब भारतको ऐसे प्रकरणोंको विश्वके सभी राष्ट्रोंके सम्मुख प्रस्तुत करना चाहिए और पाकिस्तान जैसे आतङ्की राष्ट्रपर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगवा देना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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