पण्डितोंने पूजनमें करना चाहिए सात्त्विक सामग्री का उपयोग !


पूजन करते समय पण्डितोंने इस बातका ध्यान रखना चाहिए कि पूजनमें उपयोगमें ली जाने वाली सामग्री यथासम्भव सात्त्विक हों | यथासम्भव इसलिए कह रही हूं क्योंकि इस घोर कलियुगमें पूर्ण रूपसे सभी सात्त्विक सामग्रीका मिलना अर्थात सभी सामग्रीका सात्त्विक होता अत्यन्त कठिन है ! मैंने पाया है कि सभी पंडितगण जब पंचामृत बनाते हैं तो वे शक्करके स्थानपर श्वेत चीनीका (सफेद चीनीका) प्रयोग करते हैं ! श्वेत चीनीको ब्लीच करने हेतु तमोगुणी रसायनका उपयोग किया जाता है; जो वस्तुत: खाने योग्य नहीं रह जाता है और आज अनेक रोगोंका कारण यह श्वेत चीनी है. जो मानवके खाने योग्य नहीं होता वह ईश्वरके चढानेयोग्य कैसे हो सकता है किंचित सोचें !  इसलिए सभी पंडितगणोंसे अनुरोध है कि वे शक्करके अर्थको समझें और उसमें खांड या गुडका उपयोग करना आरम्भ करें ! पंचामृत स्नानके समय भी वे यही चूक करते हैं ! कुछ पण्डितोंको यह कहनेपर उन्होंने कहा कि यह तो आजकल सभी बडे मंदिरोंमें भी चढाया जाता है ! यदि कोई वास्तु या सम्स्ग्री अज्ञानतावश सर्वत्र प्रचलित हो जाए तो वह सात्त्विक होगी ऐसा भ्रम कृपया न पालें, यह नम्र विनती हैं !



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