०२ दिसंबर, २०२०
देहलीसे भागे हुए १४ वर्षीय बच्चेको पुलिसने चार दिवसोंके पश्चात मुम्बईमें ढूंढ लिया है । पुलिसके अनुसार, बच्चा मदरसा नहीं जाना चाहता था । बच्चेके माता-पिता, इस्लामकी शिक्षाके लिए, उसे बलपूर्वक मदरसा भेजना चाहते थे, जो कि उसकी इच्छाके विरुद्ध था । इस प्रकारकी शिक्षाको वह बच्चा, बाध्यता समझता था; इसलिए वह घर छोडकर भाग गया । एक दिवस उसने भागनेका नियोजन किया । शिक्षाके पश्चात, मदरसेसे वह घर न जाकर सीधा रेलगाडीमें बैठकर मुम्बई पहुंच गया । घरपर नहीं पहुंचनेसे, परिजनने पुलिसमें सूचना दे दी थी । पुलिसने उसके मित्रोंसे जानकारी एकत्रित की, उनके मिलनेवालोंसे तथा ‘सीसीटीवी’से जानकारी एकत्रित की । रेलगाडीकी यात्रापत्रका (टिकटका) पंजीकरण वह उससे पूर्व ही करवा चुका था । इस सबके लिए उसने घरसे कुछ धन ले लिया था । वह मुम्बईमें किसी आपणिमें (दुकानमें) कार्य करता हुआ पाया गया । बच्चेको उसके माता-पिताके पास पहुंचा दिया गया है ।
मदरसोंमे कुरानकी शिक्षा बलपूर्वक दी जाती है, जिसे कई बच्चे पढना नहीं चाहते और जो मदरसोंमें पढनेके पश्चात आतङ्की बनकर देशको हानि ही पहुंचाते हैं । ऐसे मदरसोंको सदाके लिए ही बन्द कर दिया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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