अगस्त ५, २०१८
लखनऊ: ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’से सम्बन्धित संगठन ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ अब ‘दारुल कजा’की भांति समूचे देशमें ‘परिवार सुलह केन्द्र’ खोलेगा ! शरई न्यायालयके विपरीत इस केन्द्रमें किसी महिलाको अध्यक्षा बनाया जाएगा । मंचके राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजालने रविवारको बताया कि संगठनकी राष्ट्रीय समितिकी गत दिवस हुई बैठकमें प्रत्येक प्रान्तमें ‘परिवार सुलह केन्द्र’ बनानेका निर्तय लिया गया है । प्रयास होगी कि एक वर्षके अन्दर देशके सभी प्रान्तोंमें ऐसे केन्द्र खोल दिए जाएं । उन्होंने बताया कि दारुल कजामें जहां पुरुषको अध्यक्ष बनाया जाता है, वहीं ‘परिवार सुलह केन्द्र’में किसी महिलाको प्रमुख बनाया जाएगा । यद्यपि प्रकरण सुलझानेमें ‘उलमा’की सहायता भी ली जाएगी । मध्यस्थता इकाईके रूपमें कार्य करने वाले इन केन्द्रोंमें सभी धर्मके प्रकरणको सुलझाया जाएगा; लेकिन मुसलमानोंसे सम्बन्धित तलाक तथा सम्पत्ति सहित विभिन्न प्रकरणपर विशेष ध्यान दिया जाएगा ।
ज्ञात हो कि कुछ महिला संगठन ‘ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’द्वारा देशमें विभिन्न स्थानोंपर मुसलमानोंमें तलाक, सम्पत्ति तथा दीगर मसायलके समाधानके लिए खोले गए दारुल कजामें महिला काजीकी नियुक्तिकी मांग काफी पहले से कर रहे हैं, यद्यपि अभी इसपर कोई कार्यवाही नहीं हुई है । अफजालने ‘ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’पर आरोप लगाया कि तीन तलाकको उचित बताने वाले लोगोंद्वारा संचालित दारुल कजामें महिलाओंको साधारणतया न्याय नहीं मिलता । दारुल कजा कुटुम्बको तोडनेका कार्य करते हैं । हम प्रयास करेंगे कि कुटुम्बको जोडे । उन्होंने कहा कि ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ देश भरमें फैले अपने कार्यकर्ताओंसे विनती करेगा कि वे स्थान-स्थान ‘परिवार सुलह केन्द्र’ खुलवाएं । ‘परिवार सुलह केन्द्र’में लोगोंको उनके वैधानिक अधिकारोंके बारेमें भी बताया जाएगा ।
अफजालने बताया कि उनके संगठनने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओंको गैर शासकीय वृत्ति (पेंशन) देनेकी योजना आरम्भ की है । दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्रमें लगभग १०० महिलाओंको दो माहसे यह वृत्ति (पेंशन) मिल रही है । शीघ्र ही इस योजनाका विस्तार किया जाएगा । यह वृत्ति (पेंशन) पानेकी इच्छुक महिलाएं ‘परिवार सुलह केन्द्र’पर ही इसके लिए पञ्जीयन करा सकेंगी । ज्ञात हो कि ‘ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ने देशके विभिन्न प्रान्तोंमें दारुल कजा खोली हैं । इनका उद्देश्य मुसलमानोंके तलाक, सम्पत्ति इत्यादिसे सम्बन्धित प्रकरणका शरई समाधान उपलब्ध कराना है । मण्डलने देशके विभिन्न प्रान्तोंमें ‘दारुल कजा’ खोलनेका निर्णय किया था ।
बाद में, मण्डलने गत १५ जुलाईको दिल्लीमें हुई अपनी कार्यकारिणी बैठकके मध्य इस विवादपर स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि यह कोई समानान्तर न्यायालय नहीं, वरन मध्यस्थता परिषद हैं । इनमें किए निर्णयको सामान्य न्यायालयमें चुनौती दी जा सकती है ।
स्रोत : जी न्यूज
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