सार्वजनिक मंचसे हिन्दुओंके लिए घृणा, प्रधानमन्त्री मोदी और अमित शाहके लिए अभद्र टिप्पणी 


२५ जुलाई, २०२१
      ‘जनन्याग क्रिस्थुवा पेरवई अमाईपु’ नामक ‘एनजीओ’के परामर्शदाता व ईसाई ‘पादरी’ जॉर्ज पोन्नैयाने ‘(George Ponniah) कन्याकुमारीके अरुमनईमें आयोजित एक सभामें हिन्दू विरोधी टिप्पणी करते हुए कहा कि विधानसभा चुनावमें द्रमुककी विजय ईसाइयों और मुसलमानोंद्वारा दी गई भीख थी ।
       उन्होंने हिन्दू धर्म, प्रधानमन्त्री मोदी और गृहमन्त्री अमित शाहके विषयमें भी अपमानजनक टिप्पणी की थी । उन्होंने कहा था, “नरेंद्र मोदीका अन्तिम दिवस अत्यधिक दयनीय होगा । मैं लिखकर दे सकता हूं; यदि जिस भगवानको हम पूजते हैं, वह वास्तवमें जीवित है, तो इतिहास देखेगा कि मोदी और अमित शाहके दुर्गन्धयुक्त (सडे) शरीरको कुत्ते और कीडे खाएंगे ।”
      इसके अतिरिक्त उन्होंने नागरकोलीके भाजपा विधायक एम आर गांधीको लक्ष्य करते हुए कहा था, “वे इसलिए पादुका (चप्पल) नहीं पहनते; क्योंकि वे भारत माताको पीडा नहीं देना चाहते और हम लोग इसलिए पादुका पहनते हैं, जिससे हमारे पांव मलिन न हों और भारत माताके कारण हमें कोई रोग न हो ।”
      घटनामें भाजपा सहित कई लोगोंने परिवाद प्रविष्ट करवाया था । अरुमनई पुलिसने उसपर भारतीय दण्ड संहिताके अधिनियम १५३ ‘ए’, २९५ ‘ए’, ५०५ ‘(ii)’ और ५०६ ‘(i)’के अन्तर्गत घटना प्रविष्ट की है; इसके अतिरिक्त उनपर ‘आईपीसी’के अधिनियम २६९ और १४३ व महामारी रोग अधिनियमकी ‘धारा ३’के अन्तर्गत बैठक आयोजित करने, प्रतिबन्धोंका उल्लङ्घन करनेके लिए भी घटना प्रविष्ट किया गया था ।
      ‘इंडियन एक्सप्रेस’के विवरणके अनुसार, भाषणका दृश्यपट सार्वजनिक होनेके पश्चात ‘पादरी’का जो विरोध आरम्भ हुआ, उसे देख उन्होंने सार्वजनिक रूपसे क्षमा मांग ली थी ।
       ऐसे पादरियोंको देशसे निष्कासित कर देना चाहिए, जो रहते भारतकी भूमिपर है; किन्तु उसका सम्मान लेशमात्र भी नही करते; अपितु अपशब्दोंका प्रयोग करते है । ये देश विरोधी तत्त्व भारतको भीतरसे दुर्बल करते जा रहे हैं । केन्द्र शासनको चाहिए कि समय रहते ऐसे विषैले लोगोंको चिह्नितकर उनपर कठोर कार्यवाही करे, जिससे अन्योंको भी सन्देश जाए कि भारतके विरुद्ध एक शब्द भी सहन नही किया जाएगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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