उत्तरप्रदेशतक फैला कश्मीरके पत्थरबाजोंका जाल, कार्यके नामपर दिया जाता था प्रशिक्षण !


जून २०, २०१८

जनवरी माहसे कश्मीरमें पत्थरबाजोंकी बन्धनमें रहे बागपत और सहारनपुर जनपदके काफी युवक छूटकर भाग निकलनेमें सफल रहे । कश्मीरसे छूटकर घर पहुंचे पीडित युवकोंने बताया कि वे कश्मीरमें सिलाईके निर्माणशालामें (फैक्ट्री) चाकरी हेतु गए थे; लेकिन निर्माणशाला (फैक्ट्री) अधिकारीने कश्मीरियोंकी सहायतासे उन्हें बन्धक बना लिया और उन्हें पत्थरबाजी करनेका प्रशिक्षण देकर सेनाके जवानोंपर पत्थरबाजी करनेको विवश किया । पीडितोंका कहना है कि जब इन लोगोंने सेनाके जवानोंपर पत्थरबाजीसे मना कर दिया तो इन्हें मारा-पीटा जाता था !

बडौत कोतवाली थाना क्षेत्रके गुराना रोडपर रहने वाले युवक नसीमने बताया कि वह इसी वर्ष जनवरी माहके अन्तमें बालैनी थाना क्षेत्रके डोलचा गांव निवासी शमीम, ढिकाना गांव निवासी अंकित, सहारनपुर जनपदके नानौता निवासी मोहम्मद अजीम राव, नकुड निवासी बबलू और पंकज और अन्य युवकोंके साथ कश्मीरके पुलवामामें लस्तीपुरा गए थे । वहां उन्हें ‘डिवाइन इंडस्ट्रियल फर्म’में सिलाईकी चाकरी मिल गई थी । उसीमें कश्मीरके भी कई युवक कार्य करते थे । निर्माणशाला (फैक्ट्री) अधिकारी एजाज वाणी उनपर पत्थरबाजी करनेका दवाब बनाने लगा ।

कश्मीरमें जब भी सेनाके जवान किसी आतंकवादीसे भिडन्त करते थे तो आतंकवादी गांवमें घुस जाते थे और किसी भी मकानमें शरण ले लेते थे । उसके बाद स्थानीय लोग सेनाके ध्यानको भटकानेके लिए उनपर पत्थरबाजी आरम्भ कर देते थे । युवकोंने बताया कि उनके साथ वहांपर पिटाई भी की जाती थी ।

सेनापर दबावके कारण पत्थरबाजीसे तंग आकर, ये लोग वहांसे किसी तरह भाग निकलना चाहते थे । वहांसे भागनेके लिए इनलोगोंने वहांके ही एक स्थानीयसे सम्पर्क किया । उसने कश्मीरसे बाहर निकालनेके लिए १० सहस्त्र रुपये मांगे ! इन्होंने १० सहस्त्र दिए और किसी तरह कश्मीरसे भागकर दिल्ली पहुंचे । दिल्ली पहुंचनेके बाद ये लोग अपने-अपने घर चले गए ।

बडौत कोतवाली पहुंचे पीडित युवक नसीमने बताया कि निर्माणशाला (फैक्ट्री) अधिकारी और उनके साथ कार्य करने वाले कश्मीरी युवक उनपर दवाब बनाते थे कि सेनासे भिडन्त आरम्भ हो गई है, सेनाने गांवको घेर लिया है; इसलिए, सेनाका ध्यान भटकानेके लिए पथराव शुरू कर दो और ‘देखते ही देखते’ चारों ओरसे सेनाके जवानोंपर झुण्डोंमें पत्थरबाजी आरम्भ हो जाती थी । पीडितोंकी माने तो उन्हें पत्थरबाजोंके साथ भेजा जाता था और पथरबाजी करनेके लिए उन्हें कश्मीरी वेशभूषाका कुर्ता पायजामा भी पहनाया जाता था, ताकि वे भी कश्मीरी लगे ।

पीडित नसीमने बताया कि घर पहुंचनेके बाद निर्माणशाला (फैक्ट्री) अधिकारी एजाज वाणीने उसे चलभाषपर धमकी दी !  उसने कहा कि तुमलोग मुझे नहीं जानते हो, यदि मैं चाहूं तो तुम लोगोंको दिल्लीसे ही उठवा सकता हूं । पीडित बागपत कोतवाली पहुंचकर पुलिससे सुरक्षाकी विनती की है ।

स्रोत : जी न्यूज



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