महबूबा मुफ्तीको नहीं सहन हुआ ‘जमात-ए-इस्लामी’पर प्रतिबन्ध, की इस कृत्यकी निंदा !


मार्च १, २०१९


‘पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी’की अध्यक्षा महबूबा मुफ्तीने जम्मू कश्मीरमें ‘जमात-ए-इस्लामी’पर प्रतिबन्ध लगानेके केन्द्र शासनके निर्णयकी शुक्रवार, १ मार्चको निंदा की और कहा कि यह राज्यके राजनीतिक प्रकरणसे बाहुबलसे निपटनेकी केन्द्र शासनकी नीतिका एक अन्य उदाहरण है । उल्लेखनीय है कि गुरुवार, २८ फरवरीको केन्द्रीय गृह मन्त्रालयने ‘अवैधानिक (गैर कानूनी) गतिविधि अधिनियम’के अन्तर्गत इस संगठनपर प्रतिबन्ध लगाते हुए अधिसूचना जारी की ।

पूर्व मुख्यमन्त्री महबूबाने ‘ट्वीट’ किया, “लोकतन्त्र विचारोंका संघर्ष होता है, ऐसेमें ‘जमात-ए-इस्लामी’पर प्रतिबन्ध लगानेकी दमनात्मक कार्यवाही निंदनीय है और यह जम्मू कश्मीरके राजनीतिक प्रकरणसे अक्खड और धौंससे निपटनेकी भारत शासनकी नीतिका एक अन्य उदाहरण है ।”


उल्लेखनीय है कि केन्द्र शासनने इस आधारपर ‘जमात-ए-इस्लामी’पर पांच वर्षके लिए प्रतिबन्ध लगाया थी कि उसकी आतंकवादी संगठनोंके साथ मेलजोल है और राज्यमें पृथकतावादी आंदोलन अत्यधिक तीव्र होनेकी आशंका है ! प्रधानमन्त्री मोदीकी अध्यक्षतामें सुरक्षापर उच्चस्तरीय बैठकके पश्चात केन्द्रीय गृह मन्त्रालयने ‘अवैधानिक (गैर कानूनी) गतिविधि अधिनियम’के अन्तर्गत इस संगठनपर प्रतिबन्ध लगाते हुए अधिसूचना जारी की ।

 

“एक ओर देशप्रेमी इस बातपर अचम्भित है कि ये भयावह नाम व कृत्यवाले आतंकी संगठनों समान प्रतीत होनेवाले ये संगठन इस देशमें अभीतक चल कैसे रहे हैं ? तो दूसरी ओर महबूबा मुफ्ती इसे विचारोंकी स्वतन्त्रतावाला समूह बता रही हैं और तडप रही हैं कि इसे क्यों बन्द किया ! इसके साथ केन्द्र शासनको बाहुबली व अक्खड बता रही हैं तो महबूबा जी ! जिस राष्ट्रमें आतंकी संगठन और राजनीतिक दल बिना रोक-टोक और विचारोंकी स्वतन्त्रताके नामपर चल रहे हों, वहां कांग्रेसनीति नहीं, वरन अक्खडपना ही कार्य करता है ! अब केन्द्रसे अपेक्षा है कि वह थोडा और अक्खडपना दिखाए और आतंकियोंके मूक समर्थक नेताओं व दलोंको प्रतिबन्धित करें ! ” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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