‘बुर्के’पर बलात आपणी (दुकान) बन्द करवा रहे ‘पीएफआई’ (PFI) सदस्योंपर प्राथमिकी, उच्च न्यायालयके निर्णयके विरोधमें कर्नाटक बन्दका प्रचलित हुआ था ‘फतवा’


१७ मार्च, २०२२
       ‘हिजाब’पर कर्नाटक उच्च न्यायालयके निर्णयके विरुद्ध राज्यमें स्थान-स्थानपर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं । इस घटनामें कर्नाटक ‘पुलिस’ने बलात आपणियां (दुकानें) बन्द करवानेके आरोपमें एक अधिवक्ता समेत ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’के कार्यकर्ताओंके विरुद्ध बुधवारको (१६ मार्च २०२२ को) प्राथमिकी प्रविष्ट की है ।
      ‘पुलिस’के अनुसार, भटकल ‘थाने’में अजीम अहमद, मोहिद्दीन अबीर, शारिक और वकील तैमूर हुसैन गवईके विरुद्ध घटना प्रविष्ट की गई हैं । ‘पुलिस’ने भारतीय दण्ड संहिताकी (IPC की) धारा १४३, १४७ और २९० के अन्तर्गत प्राथमिकी प्रविष्टकी है ।
      सूचनाके अनुसार, ‘हिजाब’ विवादपर कर्नाटक उच्च न्यायालयके निर्णयके विरुद्ध आरोपितोंने मंगलवारको (१५ मार्च २०२२ को) बलात आपणियां  और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बन्द करा दिए थे । तटीय नगर भटकलको साम्प्रदायिक रूपसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है । यह उडुपीसे ९० किलोमीटरके अन्तरपर है, जहांसे ‘हिजाब’ विवाद आरम्भ हुआ था । इसे देखते हुए ‘पुलिस’ने क्षेत्रमें सुरक्षा बढा दी है ।
     वहीं, मुसलमान संगठनोंने गुरुवारको (१७ मार्च २०२२ को) कर्नाटक बन्दकी घोषणा की है; इसके लिए ‘फतवा’ प्रचलित किया गया । कर्नाटकके ‘अमीर-ए-शरीयत’ ‘मौलाना’ सगीर अहमद खान रश्दीने न्यायालयके निर्णयपर दुःख जताया और इसके विरोधमें सभी मुसलमान संगठनोंसे कर्नाटक बन्दके लिए मांग की । उल्लेखनीय है कि सगीरने कर्नाटक बन्दकी घोषणा ऐसे समयमें की है, जब ‘हिजाब’ विवादके चलते समूचे राज्यमें २१ मार्चतक धारा १४४ क्रियान्वित है ।
     उपरोक्त प्रकरण मुसलमान समाजकी वास्तविकता दर्शाने हेतु पर्याप्त है । जो बुद्धिजीवी और ‘सेकुलर’, मुसलमानको दीन (बेचारा) सिद्ध करनेमें दिन-रात लगे रहते है, वे देखे कि कैसे वे (मुसलमान) संविधानकी ‘धज्जियां’ उडानेपर आतुर है ? प्रशासनको कठोरताके साथ न्यायालयके आदेशका पालन हो, इसका ध्यान देना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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