‘पीआईबी’ने प्रचार माध्यम ‘द वायर’के द्वारा प्रचारित समाचारको बताया असत्य: ‘फैक्ट चेक’से ज्ञात हुआ सत्य
०४ मार्च, २०२१
वामपन्थी प्रचार माध्यम ‘द वायर’ने शासनद्वारा गठित ‘आईटी’ नियमोंपर कहा था कि स्वनियामक निकायके लिए एक सेवानिवृत न्यायाधीशकी अध्यक्षतामें एक ‘पैनल’का गठन किया गया है । ‘पीआईबी’के ‘फैक्ट चेक’ विभागने इसे असत्य बताया है । उनका कहना है कि इस निकायका गठन ‘पब्लिशर्स’द्वारा किया जाएगा । इसे न ‘एमआईबी’ न उसका ‘पैनल’ गठित करेगा । इसका नेतृत्व सर्वोच्च न्यायालय अथवा उच्चन्यायालयके सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति करेगा ।
उल्लेखनीय है कि असत्य समाचार प्रसारित करनेका ‘द वायर’का इतिहास रहा है । ‘द वायर’की पत्रकार रोहिणी सिंहने लिखा था कि निकृष्ट ‘वेंटिलेटर’ निर्माण करनेवाले प्रतिष्ठानके स्वामीसे भाजपासे निकट सम्बन्ध हैं । उसने लिखा था कि गुजरातमें जिस प्रतिष्ठानने १० दिनमें कोरोना रोगियोंके लिए ‘वेंटिलेटर’ निर्माण करनेका ‘दावा’ किया था; वे राज्यके चिकित्सीय मानकोंपर खरे नहीं उतर रहे हैं । यहांतक कहा गया कि इस प्रतिष्ठानका उनसे सम्बन्ध है, जिन्होंने नरेन्द्र मोदीजीको उनका नाम लिखा ‘सूट’ २०१५ में भेंट स्वरूप दिया था । यह समाचार आनेके उपरान्त ‘पीआईबी’ने बताया था कि ‘वेंटिलेटर’ क्रय नहीं किए गए; वरन दान स्वरूप दिए गए थे । वे चिकित्सीय मानकोंपर खरे उतर रहे थे ।
‘द वायर’ने यह असत्य भी प्रचारित किया था कि ‘कोरोनो’के प्रकोपके पश्चातसे राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोगके पास आनेवाले परिवादोंमें ८ गुणा वृद्धि हुई है । राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोगने इस समाचारका खण्डन किया था ।
‘द वायर’ एक वामपन्थी देशद्रोही समाचार माध्यम है, जो यदा-कदा असत्य फैलाता दृष्टिगत होता है । केन्द्र शासनको ऐसे समाचार माध्यमोंपर त्वरित प्रतिबन्ध लगाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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