पितरोंके सद्गति हेतु ‘ऑनलाइन’ सामूहिक जप आरम्भ करनेपर कष्ट होना !


पितरोंके सद्गति हेतु ‘ऑनलाइन’ सामूहिक जपको यश मिल रहा है । भारतके अतिरिक्त पांच और देशमें रह रहे प्रवासी हिन्दू इसका लाभ उठा रहे हैं ।

अब यह कैसे हो सकता है कि जिन पितरोंने कुपित होकर अपने वंशजोंके जीवनमें अनेक अडचनें निर्माण की हों, उन्हें सद्गति देने हेतु हम समष्टि प्रयास करें और हमें वे छोड दें ?
सामूहिक जपयज्ञ आरम्भ होनेसे पूर्व सर्वप्रथम मुझे उन्होंने शारीरिक कष्ट दिए । जपयज्ञ आरम्भ होनेके एक दिवस पूर्व एक चलित संगणक (लैपटॉप) असम्यक (खराब) हो गया । उसे दिखाने ले गए तो उस दिवस मैं दूसरा नूतन ‘लैपटॉप’ लेकर सेवा हेतु अपने साथ ले गई थी । उसमें एक ‘सॉफ्टवेयर’ डलवाना था तो सोचा उसे एक साधकसे डलवा लेती हूं; किन्तु उन्होंने उसे खोला तो वह पहले ठीक चला एवं उसमें भी अडचन आ गई ।
उसे दिखाने हेतु ‘इंजीनियर’को बुलाया, उन्होंने उसे ठीक कर दिया । पांच साधकोंके समक्ष उसे तीन बार बन्द करके पुनः आरम्भ करके दिखाया सब ठीक था । अगले दिवस जब मैं सेवा हेतु उसे आरम्भ कर रही थी तो वह आरम्भ नहीं हुआ । इसके पश्चात मैंने एक ‘एडिटिंग डेस्कटॉप’पर सेवा आरम्भ की तो उस दिवस वह ठीक था। अगले दिवस वह भी ‘खराब’ हो गया । इस प्रकार तीन संगणकोंपर अनिष्ट शक्तियोंका आक्रमण हो गया ।
दो दिवस पूर्वसे हमारी गोशालाकी दो बछियाएं भी अस्वस्थ हैं । दोनोंको बिना कारण ज्वर आ गया है और एकने तो दो दिवससे गोबर और मूत्र त्यागना भी बन्द कर दिया है । आश्रमके साधक और कार्यकर्ताओंको भी शारिरिक कष्ट हो रहा है । वैसे यह प्रथम बार नहीं हो रहा है, जब भी समाजको पितरोंके सद्गति हेतु कुछ भी करवाने का प्रयास करती हूं तो ऐसा ही होता है, इसीसे समझ लें कि सबके घरमें पितृदोषकी तीव्रता कितनी अधिक है ? किन्तु ईश्वर उनसे अधिक शक्तिशाली हैं; अतः इस कष्टसे भयभीत होकर हम धर्म सिखाना नहीं छोडेंगे ।

– (पू.) तनुजा ठाकुर (संस्थापिका, वैदिक उपासना पीठ)



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