पितृपक्षमें शुभ कर्म क्यों नहीं करने चाहिए ?


इस बारकी सर्व पितृ अमावस्याके दिन सामूहिक श्राद्ध निमित्त जो पार्वण श्राद्ध हुआ उसमें हमने ‘divining rods’ के माध्यमसे किस प्रकार आश्रम परिसरमें श्राद्ध निमित्त ब्राह्मणके आनेसे पूर्व ही जिन व्यक्तियोंके पितरोंके निमित्त श्राद्ध होना था, वे सूक्ष्मसे आ चुके थे वह प्रयोग करके दिखाया  । ऐसे श्राद्ध कर्ममें तृप्त एवं अतृप्त दोनों ही पितर आते हैं इसलिए आश्रम परिसरका वातावरणमें नकारात्मकता आ गयी थी जिसे हमने उस यन्त्रके प्रयोगसे दिखाया और जैसे ही ब्राह्मण सर्व पितृ कर्म करवाकर भोजन कर चले गए तो वातावरणका परिसर पुनः सकारात्मक हो गया  ।  कुछ लोग पूछते हैं कि पितृपक्षमें शुभ कर्म क्यों नहीं करने चाहिए यह उसका उत्तर है, जब आश्रम जैसे शुद्ध और पवित्र स्थान लोगोंके पितरोंके आगमनसे नकारात्मक हो जाता है तो लोगोंके घर क्यों नहीं होंगे ? प्रेत आवेशित घरमें इसलिए इन पंद्रह दिवसोंमें शुभ कर्म करना वर्जित है ! आजके हिन्दुओंको सन्तोंकी और शास्त्रोंकी बातें त्वरित समझमें नहीं आती है इसलिए आजके आधुनिक उपकरणोंकी सहायता लेनी पडती है  ।



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