सितम्बर ५, २०१८
दिल्ली उच्च न्यायालयमें मंगलवारको एक याचिका प्रविष्ट की गई, जिसमें ‘एआईएमआईएम’का एक राजनीतिक दलके रूपमें पंजीकरण रद्द करनेकी मांग की गई है । याचिकामें आरोप लगाया गया है कि वह केवल मुसलमानोंसे सम्बन्धित प्रकरण उठाती है और धर्मके नामपर वोट मांगती है ।
शिवसेनाकी तेलंगाना इकाईके अध्यक्षद्वारा प्रविष्ट याचिकामें चुनाव आयोगके १९ जून २०१४ के आदेशको निरस्त करनेकी मांग की गई है, जिसके द्वारा ‘ऑल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’को तेलंगानाके राज्यस्तरीय दलकी मान्यता दी गई थी ।
याचिकाकर्ता तिरुपति नरसिंह मुरारीने दावा किया कि ‘एआईएमआईएम’का संविधान और काम उच्चतम न्यायालयद्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशोंके विरुद्ध है और दलको अयोग्य ठहराया जाना चाहिए; क्योंकि उसके लक्ष्य और उद्देश्य धर्मनिरपेक्षताकी अवधारणाके विरुद्ध हैं । यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियमकी आवश्यकताओंमें से एक है ।
अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैनद्वारा प्रविष्ट याचिकामें चुनाव आयोगको ‘एआईएमआईएम’को पंजीकृत राजनीतिक दलके रूपमें मान्यता देने और मानने से रोकनेका निर्देश देनेकी मांग की गई है ।
“‘एआईएमआईएम’ सदृश आतंक रूपी दलकी मान्यता न्यायालयने त्वरित रद्द करनी चाहिए” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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