अक्तूबर ३०, २०१८
नई दिल्ली : प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी बुधवार, ३१ अक्टूबरको गुजरातमें सरदार वल्लभ भाई पटेलकी प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’का लोकार्पण करेंगे । इस मध्य वहां कार्यक्रम आयोजित होगा । समूचे विश्वकी दृष्टि इस कार्यक्रमपर; होंगी क्योंकि सरकारका दावा है कि यह प्रतिमा अमेरिकाकी ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’से भी ऊंची है; लेकिन गुजरातका एक गांव ऐसा भी है, जो इस कार्यक्रमके लिए वहां पहुंचने वाले मोदीका स्वागत नहीं करेंगे ! यह गांव है यहांका केवडिया गांव !
‘सरदार सरोवर बांध’के निकट लगभग २२ गांवोंके प्रमुखोंने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीको खुला पत्र लिखा है । इसमें उन्होंने मोदीके इस कार्यक्रमका बहिष्कार किया है । उन्होंने उसमें लिखा है ‘हम आपका स्वागत नहीं करेंगे !’ उनका कहना है कि इससे इस पूरे क्षेत्रमें प्राकृतिक संसाधनोंको बहुत बडी हानि होगी । इस पत्रमें सभी गांव प्रमुखोंके हस्ताक्षर भी हैं ।
पत्रमें लिखा है, “इस क्षेत्रमें विद्यमान जंगल, नदियां, झरने, भूमि और कृषिने हम लोगोंको पीढियोंसे सहायता दी है । हम इन्हींपर आश्रित थे; लेकिन अब सबकुछ नष्ट हो गया है और यहां समारोहका आयोजन हो रहा है । क्या यह किसी सम्बन्धीकी मृत्यु पर प्रसन्नता मनाने जैसा नहीं है ! हम तो यही अनुभव करते हैं ।” गांववालोंने पत्रमें मोदीसे कहा है कि हम सभी ३१ अक्टूबरको यहां आपका स्वागत नहीं करेंगे !
गांववालोंने पत्रमें ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’को साधारण लोगोंके पैसोंकी बर्बादी बताया है । उनका कहना है कि आम लोगोंद्वारा कडे प्रयासोंसे अर्जित किए गए पैसोंको इस प्रकारकी परियोजनापर बर्बाद किया जाता है । जबकि अभी भी इस क्षेत्रके कई गांव आज भी विद्यालय, चिकित्सालय और पेयजलकी समस्या से जूझ रहे हैं !
उन्होंने लिखा है, “यदि सरदार पटेल स्वयं अपनी आंखोंसे प्राकृतिक सम्पदाको हानि होते और हमारे साथ अन्याय होते देखते तो वह भी रोते ! जब हम अपनी समस्याएं उठाते हैं तो हमें पुलिससे प्रताडना मिलती है । आप हमारी गम्भीर स्थितिको समझते क्यों नहीं हैं ?”
इससे पूर्व यहांके जनजाति सामाजिक कार्यकर्ताओंने घोषणा की थी कि सरदार सरोवर बांधके निकटके ७२ गांवोंके लोग ३१ अक्टूबरको भोजन न पकाकर अपना विरोध जताएंगे ! इनमेंसे एक जनजातिके मुखिया आनंद माजगावोकरने बताया कि उन्होंने पूर्वी गुजरातकी जनजातियोंसे अनुरोध किया है कि ३१ अक्टूबरको वे सभी हमारे विरोध प्रदर्शनमें सम्मिलित हों । हमें पूर्ण विश्वास है कि सभी जनजातियां हमारा साथ देंगी ।
“वस्तुतः कटु सत्य यही है कि आजका समूचा तथाकथित विकास प्राकृतिक संसाधनोंका दोहन कर किया जाता है और आगे चलकर इसके दुष्परिणाम सामने आते हैं और जब-जब मानवने प्रकृतिको इसके मूल रुपसे हटाकर अपने अनुसार डालनेका प्रयास किया है, मानव सदैव पराजित हुआ है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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