जनवरी १, २०१८
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीने राम मन्दिरको लेकर बहुत महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया है । मोदीने मंगलवार, १ जनवरीको कहा कि राम मंदिर निर्माणके लिए कोई अध्यादेश तभी लाया जा सकता है, जब इसपर वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण हो जाए ।
समाचार विभाग ‘एएनआई’को दिए साक्षात्कारमें उन्होंने राम मंदिरको लेकर न्यायालयकी कार्यवाहीमें देरीको लेकर कांग्रेसपर लक्ष्य साधा । उन्होंने कहा कि कांग्रेसके अधिवक्ता उच्चतम न्यायालयमें बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं, इसके चलते राम मंदिरकी सुनवाईकी गति धीरे हो गई है ।
राम मंदिरके अब भी बीजेपीके लिए संवेदनशील मुद्दा होनेके प्रश्नपर मोदीने कहा, “हमने अपने घोषणा-पत्रमें कहा था कि इसका समाधान संवैधानिक ढंगसे किया जाएगा ।” भाजपाने लोकसभा मतदानके अपने घोषणापत्रमें कहा था कि वह अयोध्यामें भव्य राम मंदिर निर्माण चाहती है ।
“न्यायालयकी प्रक्रिया तो वर्षोंसे चल रही है तो क्या हिन्दुओंको अब वर्षों तक प्रतीक्षा करनी होगी ? और जब न्यायालयकी प्रतीक्षा ही करनी है तो भाजपाकी आवश्यकता ही क्या है ? वचनके पश्चात ऐसा वक्तव्य सुनकर आज प्रत्येक रामभक्त ठगा हुआ अनुभव कर रहा है और हिन्दुओंकी सबसे बडी विडम्बना है कि अपने धर्मके निर्णय अब शंकराचार्यद्वारा नहीं वरन नेताओंद्वारा निर्धारित किए जाते हैं, इसे परिवर्तन करने हेतु ही अब हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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