३७ दिवससे अनशनपर बैठे सन्त आत्मबोधानन्दको बलात् एम्समें प्रविष्ट कराया, बोले सानन्दकी भांति जीवित नहीं लौटूंगा !


नवम्बर २९, २०१८

गंगा रक्षाके लिए गत ३७ दिवससे अनशन कर रहे मातृ-सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्दको प्रशासनने बलात उठाकर ‘ऋषिकेश एम्स’में प्रविष्ट करा दिया है । आत्मबोधानन्दने बलखत उठाकर ले जानेका काफी विरोध किया, किन्तु उनकी एक नहीं चली । वहीं स्वामी शिवानन्दका कहना है कि वे पुलिस प्रशासनके दलपर अपहरणका अभियोग प्रविष्ट कराएंगे ।

मातृ-सदनके ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द गंगा रक्षाके लिए २४ अक्तूबरसे अनशन कर रहे हैं । बृहस्पतिवार, २९ नवम्बर दोपहर २.३० बजे एसडीएम मनीष कुमार सिंह, सीओ स्वप्न किशोर और तहसीलदार सुनैना राणा पुलिस बलके साथ मातृ-सदन पहुंचे ।
अधिकारियोंके आते ही मातृ-सदनके परमाध्यक्ष स्वामी शिवानन्द भडक गए । इस मध्य उन्होंने आश्रममें धारा-१४४ लगाना नियमोंके विरुद्ध बताया । इसके पश्चात एसडीएमने स्वामी शिवानन्दसे ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्दको ले जाने की अनुमति मांगी, किन्तु अनुमति नहीं मिलनेपर आत्मबोधानन्दको बलात् उठाकर रोगीवाहनमें (एम्बुलेंसमें) बैठा दिया गया ।

एसडीएम मनीष कुमार सिंहने बताया कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द काफी दिनोंसे अनशनपर हैं और स्वास्थ्यकी जांच भी नहीं करवा रहे । उनकी जीवन रक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखनेके लिए उन्हें एम्समें प्रविष्ट कराया गया है ।
उधर, मातृ सदनके परमाध्यक्ष स्वामी शिवानन्द सरस्वतीने कहा कि आत्मबोधानन्दने उनके १५ प्रश्नोंके उत्तर देने वाले चिकित्सकोंसे ही उपचार कराने मांग रखी है । उन्होंने कहा है कि स्वामी सानन्दकी भांति आत्मबोधानन्द भी एम्स ऋषिकेशमें सुरक्षित नहीं हैं ।
ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्दने कहा कि जिसप्रकार स्वामी सानन्दको बलात् उठाकर ले जाया गया था, उन्हें भी उसीप्रकार ले जाया जा रहा है !  एम्समें उनका जीवन सुरक्षित नहीं है और अब एम्ससे जीवित लौटनेकी आशा नहीं है, किन्तु अंतिम सांस तक गंगाकी रक्षाके लिए उनका अनशन जारी रहेगा ।
स्वामी शिवानन्द सरस्वतीने कहा कि गंगाकी रक्षाके लिए शासन और प्रशासनकी ओरसे कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है । जिलाधिकारीने भी अभी तक वार्ता करनेका प्रयास नहीं किया । उन्होंने कहा कि हरिद्वारके डीएम दीपक रावत, एसडीएम मनीष कुमार सिंह और तहसीलदार सुनैना राणाको तत्काल प्रभावसे निलम्बित कर, इनकी सम्पत्तिकी जांच कराई जानी चाहिए ।

 

“साधु, सन्यासी व महात्माओंका सत्कार करने वाली इस धरापर गंगा रक्षाके लिए लड रहे वृद्ध सन्यासियोंका ऐसा अपमान प्रशासनके लिए लज्जाजनक है । गंगा व साधुओंके प्रति ऐसी उदासीनतासे अब स्पष्ट है कि हिन्दू राष्ट्र ही सर्व समस्याओंका एक समाधान है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



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