खालिस्तानियोंकी समर्थक दिशाके समर्थनमें आए अरविन्द केजरीवाल, अधिवक्ता निकिता और शान्तनु भागे
१७ फरवरी, २०२१
देहली पुलिसद्वारा अधिवक्ता निकिताको ढूंढा जा रहा है । भारत विरोधी खालिस्तानी उपद्रवमें प्राप्त ‘टूलकिट’में सहयोगी दिशा रविको पुलिसने बन्दी बनाया था । दिशाको पांच दिनोंके लिए पुलिस अभिरक्षामें रखा गया । दिशाने अपने चलभाषसे सारा विवरण मिटा दिया था । जिसे पुनः प्राप्त करनेके लिए ‘फोरेंसिक लैब’में भेज दिया गया । दिशाके समर्थनमें आई अधिवक्ता निकिता भी खालस्तानियोंके साथ जुडी हुई पाई गई । पुलिसने उसके घरपर, सायंकाल अधिक पूछताछ नहीं की और अधिवक्ता होनेके कारण, सहयोगकी सहमति प्राप्त होनेपर, उसके घरकी जांच नहीं की । पुलिसने उससे सहयोगकी सहमति हेतु हस्ताक्षर करा लिए । रातमें ही अधिवक्ता निकिता भाग गई और उसके माता-पिताने उसके बारेमें कुछ बतानेसे मना कर दिया है ।
‘आप पार्टी’से जुडे होनेके कारण, केजरीवाल निकिताके पक्षमें खडे हो गए हैं । २१ वर्षीय दिशाको बन्दी बनाए जानेपर केजरीवालने इसे लोकतन्त्रपर आक्रमण बताया और किसानोंके समर्थनमें दिशाद्वारा सहायताको अपराध नहीं माना । कांग्रेसकी ‘प्रियंका गांधी’ने निहत्थी दिशाके समक्ष शस्त्रधारियोंको भयभीत बताया । अन्य कांग्रेसी नेताओंने भी अपना रोना रोया ।
खालिस्तानी देश विरोधी उपद्रवियोंके आन्दोलनमें सहस्रों खलिस्तानियोंके सम्मिलित होनेकी आशङ्का है, जो खालिस्तानी समर्थक गुरुपतवन्त सिंह ‘पन्नु’से प्रभावित हैं ।
भारतमें किसानोंके नामपर, खालिस्तानियोंद्वारा साम्प्रदायिक उपद्रव फैलानेका प्रयास किया गया । इसे भातीय शासनद्वारा कठोरतासे नष्ट किया जाना चाहिए । अपनी संवेदनशीलताका प्रभाव दिखाकर रोनेवाले राजद्रोहियोंको, उनके सहयोगियों सहित ढूंढकर कठोरतम दण्ड दिया जाना चाहिए, चाहे वे उच्चतर अधिकारी ही क्यों न हों ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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