हिन्दुओंके दबावके आगे पुलिस झुकी : धर्मान्धपर की कार्यवाही
१० अप्रैल, २०२१
मध्यप्रदेशके इन्दौरमें शनिवार १० मार्चको ‘व्हाट्सऐप्प’पर एक सन्देश और चित्र प्रसारित हुआ, जिसमें हिन्दू संन्यासी यति नरसिंहानंदजीका अपमान किया गया था और इसके विरोधमें हिन्दूवादियोंने पुलिसमें परिवाद कराया । परिवादपर कार्यवाही नहीं करते हुए पुलिसने केवल चित्र निकालकर प्रकरणको समाप्त मान लिया था; किन्तु यह सूचना मिलनेपर हिन्दूवादी पुनः सक्रिय हुए और पुलिसको आरोपी मुश्ताक कादरीको बन्दी बनाना पडा ।
उल्लेखनीय है कि इंदौर नगरके मुस्लिम बहुल क्षेत्र आजाद नगरमें एक औषधि विक्रय केन्द्र है, जिसका नाम ‘राहत मेडिकल’ है और इसका संचालक मुश्ताक कादरी नामक एक धर्मान्ध है । इसने हिन्दू सन्त यति नरसिंहानंद सरस्वतीका अपमान करनेके लिए, इनके चित्रोंकी एक शृंखला अपने औषधि विक्रय केन्द्रके उस स्थानपर चिपकाई, जहांपर लोग खडे होते हैं और विक्रेतासे औषधि प्राप्त करते हैं । जब इसका चित्र सार्वजनिक हुआ तो हिन्दूवादियोने इंदौर पुलिसके ‘क्राइम वॉच’ क्रमांकपर सामूहिक रूपसे परिवाद प्रविष्ट कराया और हिन्दू जागरण मंचके कार्यकताओंने भी प्रदर्शन किया, जिसके दबावमें पुलिसको उक्त कार्यवाही करनी पडी । यद्यपि पुलिसने नगरमें गृहबन्दीके कारण केवल भारतीय दण्ड संहिता १९७३ की धारा-१५१के (शांतिभंगकी आशंका) अनुसार ही कार्यवाही की ।
नूतन सूचनाके अनुसार इस आरोपीको छुडानेके लिए धर्मान्ध समुदायने ११ मार्च, रविवारको थानेपर प्रदर्शन भी किया और उसके इस कृत्यका समर्थन किया ।
यह प्रसन्नताका विषय है कि हिन्दू अब ऐसे प्रकरणोंपर सचेत हो, अपने स्वर मुखर करने लगे हैं; किन्तु इतना होना भी प्रथमदृष्टया योग्य ही है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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